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दिल्ली हाईकोर्ट ने तेज गति से गाड़ी चलाने के आरोप में मनीष कुमार को बरी किया, कहा- तेज गति से लापरवाही साबित नहीं होती

दिल्ली हाईकोर्ट ने तेज गति से गाड़ी चलाने के आरोप में मनीष कुमार को बरी कर दिया. न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी ने कहा कि तेज गति से गाड़ी चलाने से लापरवाही का निष्कर्ष नहीं निकलता.

Delhi High Court
Aarika Singh Edited by Aarika Singh

दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि तेज गति में गाड़ी चलाने से यह निष्कर्ष नहीं निकलता कि चालक ने लापरवाही से तेज गति से वाहन चलाया था. न्यायमूर्ति सौरभ बनर्जी ने उक्त टिप्पणी करते हुए एक व्यक्ति मनीष कुमार को तेज गति से कार चलाने और दो पैदल यात्रियों को टक्कर मारने के आरोप से बरी कर दिया. उन दोनों की बाद में मृत्यु हो गई थी.

न्यायमूर्ति ने यह भी कहा कि यह मान भी लिया जाए कि आरोपी तेज गति से वाहन चला रहा था तो यह निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त नहीं है कि वह लापरवाही से तेज गति से कार चला रहा था. उन्होंने यह टिप्पणी उस व्यक्ति की अपील पर सुनवाई करते हुए की जिसमें उसने निचली अदालत के तेज गति से वाहन चलाने के जुर्म में दोषी ठहराने एवं दो साल की सजा को चुनौती दी थी. न्यायमूर्ति ने उसे बरी करते हुए कहा कि कोई ऐसा सबूत पेश नहीं किया गया है जिससे पता चले कि वह कार को तेज गति से चला रहा था. किसी भी गवाह या अभियोजन पक्ष की ओर से इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई कि तेज गति का क्या मतलब है या वह व्यक्ति किस गति से कार चला रहा था.

कोर्ट ने कहा कि खामियां होने के कारण अभियोजन पक्ष यह साबित करने में सक्षम नहीं है कि आरोपी तेज गति से कार चला रहा था, जिसकी वजह से दो पैदल यात्रियों की मृत्यु हो गई.

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-भारत एक्सप्रेस



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