दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महिला की ओर से अपने ससुराल वालों के खिलाफ दर्ज कराई गई दहेज उत्पीड़न एक क्रूरता में मामले में दर्ज प्राथमिकी को रद्द कर दिया है. यह प्राथमिकी शादी के महज 40 दिन बाद उसके पति के आत्महत्या के बाद दर्ज कराई गई थी. जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने कहा कि लगाए गए आरोपों से लगता है कि यह स्पष्ट रूप से कानूनी प्रक्रिया के दुरु पयोग का मामला है. इस दशा में आपराधिक कार्यवाही को जारी रखना न्याय के हित में नहीं होगा.
याचिका में आरोप पत्र रद्द करने की मांग
महिला की ननद, ससुर एवं सास ने अपने खिलाफ आईपीसी की धारा 498ए, 406 और 34 के तहत वर्ष 2016 में दर्ज कराई गई प्राथमिकी व जांच के बाद दाखिल आरोपपत्र को रद्द करने की मांग करते हुए याचिका दाखिल की थी. दोनों की शादी मार्च 2016 में हुई थी. ससुराल वालों ने आरोप लगाया कि इसके तुरंत बाद दंपति के बीच मतभेद पैदा हो गए और पति उदास, परेशान और हताश रहने लगा. महिला के परिवार ने न केवल पति पर दबाव डाला, बल्कि उसे हर हाल में उसके साथ रहने की धमकी भी दी.
शादी के बाद पति की आत्महत्या
महिला के माता-पिता ने उन्हें डरा-धमकाकर उनके पूरे परिवार को दहेज और घरेलू हिंसा के झूठे मामले में फंसाने की धमकी दी थी. इससे मानिसक व शारीरिक रूप से प्रताड़ित होकर पति ने शादी के बमुश्किल 40 दिन बाद ही 13 अप्रैल, 2016 को आत्महत्या कर ली. कोर्ट ने कहा कि यह एक दुर्भायपूर्ण मामला है, जहां विवाह 40 दिन भी नहीं चल पाया और पति ने आत्महत्या कर ली.
इससे संबंधों में खटास आ गई और उसके बाद मुकदमेबाजी शुरू हो गई. महिला के अपनी ननद पर लगाए गए आरोप में कोई सच्चाई नहीं है. यह बिना किसी आधार के ननद को किसी तरह से फंसाने का एक प्रयास है. ससुर पर भी नकदी, चार पहिया वाहन और महंगे आभूषणों की मांग के बेबुनियाद आरोप हैं. दहेज उत्पीड़न की शिकायत में आरोप अस्पष्ट हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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