फाइल फोटो
भारतीय क्रिकेटर अभिषेक शर्मा को पर्सनैलिटी राइट्स (व्यक्तित्व अधिकारों) के संरक्षण के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी अंतरिम राहत मिल गई है. अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह क्रिकेटर की छवि और व्यक्तित्व का कथित रूप से दुरुपयोग करने वाली विभिन्न आपत्तिजनक सोशल मीडिया पोस्ट और कमर्शियल (व्यावसायिक) लिंक्स को तत्काल हटाने के लिए एक अंतरिम आदेश पारित करेगा.
जस्टिस ज्योति सिंह की कोर्ट ने जारी किया समन
जस्टिस ज्योति सिंह की एकल पीठ ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित पक्षों को समन जारी किया है. विवादित यूआरएल (URL) की सटीक जानकारी देने के लिए अभिषेक शर्मा के वकील ने कोर्ट में एक अतिरिक्त हलफनामा (अफ़िडेविट) दायर किया है. उन्होंने अदालत को अवगत कराया कि कुछ आपत्तिजनक पोस्ट को हटा दिया गया है, लेकिन अभी भी फेसबुक (Facebook) और इंस्टाग्राम (Instagram) पर दो ऐसी सोशल मीडिया पोस्ट मौजूद हैं जो अधिकारों का उल्लंघन करती हैं.
इसके साथ ही, अभिषेक के वकील ने बताया कि ई-कॉमर्स दिग्गज अमेजन (Amazon) और फ्लिपकार्ट (Flipkart) पर भी क्रिकेटर की लिखित इजाजत के बिना पूरी तरह से कमर्शियल मकसद (व्यावसायिक लाभ) के लिए उनकी छवि और तस्वीरों का अवैध इस्तेमाल किया गया था, जिन्हें शिकायत के बाद अब हटा लिया गया है.
इस हाई-प्रोफाइल मामले की सुनवाई के दौरान ‘मेटा’ (Meta) की तरफ से कोर्ट में पेश हुए वकील ने दोनों बचे हुए सोशल मीडिया पोस्ट को जल्द से जल्द हटाने की बात कही. वहीं, अमेजन के वकील ने भी अदालत को आश्वस्त किया कि वे कोर्ट के आदेश का पूरी तरह पालन करते हुए अभिषेक शर्मा की फोटो को बिना मंजूरी के इस्तेमाल करने वाले संबंधित यूआरएल को तुरंत प्लेटफॉर्म से हटा देंगे. हाई कोर्ट अब इस मामले में आगामी 17 नवंबर को अगली सुनवाई करेगा.
पापाराजी कंटेंट बनाम एआई से छेड़छाड़
पिछली सुनवाई के दौरान मेटा की ओर से पेश वरिष्ठ वकील वरुण पाठक ने कोर्ट को दलील दी थी कि शिकायत वाले कुल 8 यूआरएल में से दो अब इंटरनेट पर उपलब्ध नहीं हैं, जबकि एक लिंक केवल सामान्य ‘पापाराजी शैली’ (Paparazzi Style) की सामग्री है. उनका तर्क था कि यह लिंक प्रथम दृष्टया (प्रथम दृष्टया) पर्सनैलिटी राइट्स के उल्लंघन का आपराधिक या दीवानी मामला नहीं बनता है.
इसके विपरीत, याचिकाकर्ता क्रिकेटर अभिषेक शर्मा की ओर से पेश वकील ने इस तर्क को सिरे से खारिज करते हुए कोर्ट को एक चौंकाने वाली जानकारी दी. उन्होंने बताया कि संबंधित तस्वीर को आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक की मदद से जानबूझकर बदला और मॉर्फ किया गया है. खिलाड़ी की उनके मैनेजर के साथ ली गई एक वास्तविक तस्वीर का रंग-रूप पूरी तरह बदलकर उसे बेहद भ्रामक तरीके से इंटरनेट पर पेश किया गया है. इसलिए, इसे महज एक सामान्य पापाराजी कंटेंट मानकर खारिज नहीं किया जा सकता.
मानहानि और पर्सनैलिटी राइट्स में है बारीक अंतर- दिल्ली हाई कोर्ट
इस गंभीर तकनीकी पेंच पर टिप्पणी करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण और दूरगामी कानूनी अवलोकन साझा किया. अदालत ने कहा कि वर्तमान डिजिटल युग में मानहानि (Defamation) और पर्सनैलिटी राइट्स के मामलों के बीच अक्सर बहुत ही मामूली और बारीक अंतर रह गया है. हाई कोर्ट ने रेखांकित किया कि यह साइबर और सिविल कानून का एक ऐसा क्षेत्र है, जो तकनीक के साथ अभी लगातार विकसित (इवॉल्व) हो रहा है, और कई मामलों में मानहानि तथा पर्सनैलिटी राइट्स के उल्लंघन के तत्व एक-दूसरे के साथ गहराई से जुड़े हो सकते हैं.
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