दिल्ली हाईकोर्ट ने कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. कोर्ट ने यह नोटिस प्रश्नपत्रों को लेकर किसी के या सोशल मीडिया पर किसी भी तरह की चर्चा पर प्रतिबंध लगाने के आदेश को चुनौती दी गई है. मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की पीठ ने एसएससी से उसके इस तरह के फैसले पर सवाल उठाया और टिप्पणी किया की कोई चयन संस्था परीक्षा प्रश्नपत्रों पर चर्चा पर इस तरह की रोक नहीं लगा सकता है.
अदालत ने एसएससी से इस मुद्दे पर तीन सप्ताह में अपना जवाब दाखिल करने को कहते हुए सुनवाई स्थगित कर दी. उसने कहा कि आप ऐसा रोक नहीं लगा सकते. यह क्या है? कोई परीक्षा प्रश्नपत्र पर चर्चा नहीं कर सकता. आप ऐसा आदेश कैसे जारी कर सकते है? परीक्षा हाल से बाहर आने के बाद कम से कम हम अपने ज़माने में तो सबसे पहले प्रश्नपत्र पर चर्चा करते थे.
परीक्षा प्रश्नों पर चर्चा करने पर कार्रवाई संभव
एसएससी केंद्र सरकार और उसके मंत्रालयों व विभागों में विभिन्न ग्रुप बी (अराजपत्रित) और ग्रुप सी (गैर-तकनीकी) पदों पर कर्मचारियों की भर्ती के लिए परीक्षाएं आयोजित करता है. हर साल लाखों छात्र एसएससी परीक्षा में शामिल होते हैं.
इस तरह चर्चा पर रोक के खिलाफ विकास कुमार मिश्रा ने जनहित याचिका दाखिल की है. उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि एसएससी ने 8 सितंबर को अपने कानूनी अधिकार का प्रयोग करते हुए एक नोटिस जारी किया था, जिसमें किसी के उसके प्रश्नों पर सोशल मीडिया पर किसी भी तरह से चर्चा, विश्लेषण या पोस्ट करने वाले के खिलाफ कार्रवाई करने की चेतावनी दी थी. उसी नोटिस को हाईकोर्ट में चुनौती दिया गया है.
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-भारत एक्सप्रेस
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