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भारत-UAE प्रत्यर्पण संधि के अनुच्छेद 17 को चुनौती; दिल्ली हाई कोर्ट में क्रिश्चियन मिशेल की याचिका पर 20 फरवरी को होगा फैसला

दिल्ली हाई कोर्ट ने अगस्त वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाले के कथित आरोपी क्रिशयन मिशेल की भारत-यूएई प्रत्यर्पण संधि चुनौती वाली याचिका पर सभी पक्षों से संक्षिप्त नोट्स दाखिल करने को कहा है.

भारत-यूएई प्रत्यर्पण संधि को चुनौती देने वाली याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने सभी पक्षों से संक्षिप्त नोट्स दाखिल करने का निर्देश दिया है. अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाला मामले में कथित आरोपी क्रिशयन मिशेल की ओर से दायर याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट सुनवाई कर रहा है. वही कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई और ईडी ने अपना जवाब दाखिल कर दिया हैं. कोर्ट 20 फरवरी को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा.

मिशेल ने अपनी याचिका में 1991 में हस्ताक्षरित संधि के अनुच्छेद 17 को चुनौती दी है, जो अनुरोध करने वाले देश (इस मामले में भारत) को प्रत्यर्पित व्यक्तियों पर न केवल उस विशिष्ट अपराध के लिए मुकदमा चलाने की अनुमति देता है, जिसके लिए प्रत्यपर्ण किया गया था, बल्कि उससे जुड़े अपराधों के लिए भी मुकदमा चलाने की अनुमति देता है. 3600 करोड़ रुपये के अगस्त वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर घोटाला मामले में मिशेल ने बिचौलिए की भूमिका निभाई थी.

CBI की चार्जशीट में खुलासा

मिशेल के भारत प्रत्यर्पण के बाद सीबीआई और ईडी ने गिरफ्तार किया. वे इस मामले में जांच किए जा रहे तीन कथित मिडिलमैन में से एक है, बाकी दो गुइडो हास्चके और कार्लो जेरोसा हैं. सीबीआई ने चार्जशीट में कहा कि 8 फरवरी 2010 को वीवीआईपी हेलीकॉप्टर की आपूर्ति के लिए हुई डील से सरकारी खजाने को 398.21 मिलियन यूरो का अनुमानित नुकसान हुआ.

ईडी ने जून 2016 में जेम्स के खिलाफ चार्जशीट में कहा कि उन्होंने अगस्ता वेस्टलैंड से 30 मिलियन यूरो प्राप्त किए. इस मामले में कुल 60 आरोपी शामिल है. जिनमें से 21 ने न तो जांच में शामिल हुए है और न ही उन्हें आज तक ईडी द्वारा समन जारी किया गया है. अभियोजन पक्ष की पहली शिकायत 24 नवंबर 2014 को दायर की गई थी. जबकि 21 नवंबर 2024 को 12 वी सप्लिमेंट्री चार्जशीट दाखिल किया गया है.

ये भी पढ़ें: शाहीन बाग इलाके में एक खुली सीवर लाइन से रिसाव को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश

-भारत एक्सप्रेस



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