दिल्ली हाईकोर्ट ने चुनावी बांड के माध्यम से दिए गए दान की जांच अदालत की निगरानी में कराने की मांग करने वाली जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि सभी आरोप अटकलें पर आधारित है और उसमें कोई ठोस आधार नहीं है. मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय एवं न्यायमूर्ति तुषार राव गेडेला की पीठ ने कहा कि आरोप दो बातों पर आधारित है, एक भारतीय चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपलोड की गई जानकारी और दूसरा समाचार पत्रों की रिपोर्ट.
कोर्ट ने कहा कि इस याचिका में सामग्री क्या है? केवल दो. एक भारतीय स्टेट बैंक की चुनाव आयोग की वेबसाइट पर दी गई जानकारी कि बांड किसने खरीदे और उनकी राशि कितनी थी. अब उस जानकारी को सरकार और कुछ कंपनियों के बीच हुए लेनदेन के बीच जोड़ने का सुझाव दिया गया है. लेकिन यह किस आधार पर? समाचार पत्रों की रिपोर्ट, बस इतना ही. मुझे नहीं पता कि समाचार पत्रों की रिपोर्ट कितनी विसनीय है. यह सब अटकलें हैं. ऐसा सुझाव देने के लिए कोई ठोस सामग्री नहीं है.
28 मई को मामले में अगली सुनवाई
पीठ ने 28 मई को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा.. कोर्ट ने यह टिप्पणी सुदीप नारायण तमनकर की याचिका पर सुनवाई करते हुए की. उसने कहा कि आप यह चाहते हैं कि इस मामले की जांच सीबीआई को करनी चाहिए. यदि आप स्वयं यह दिखाने में सक्षम है कि कोई संजय अपराध हुआ है, तो आप खुद एफआईआर दर्ज कर सकते हैं. लेकिन आप खुद नहीं जानते कि वास्तव में क्या हुआ था.
बस आप जांच चाहते है जिससे कुछ सामग्री निकले और एफआईआर दर्ज करने के लिए आदेश पारित किया जाए. क्या यह स्वीकार्य है? इस दौरान सीबीआई के वकील ने कहा कि याचिका में लगाए गए आरोप अस्पष्ट हैं. प्रवर्तन निदेशालय तथा आयकर विभाग सहित कई अधिकारियों के खिलाफ लगाए गए हैं. लेकिन मामले को आगे बढ़ाने से पहले याचिकाकर्ता को पहले साबित करना हो कि याचिका किस तरह से स्वीकार्य है.
-भारत एक्सप्रेस
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