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अल फलाह यूनिवर्सिटी के संस्थापक जवाद सिद्दीकी की जमानत पर दिल्ली हाई कोर्ट ने फैसला रखा सुरक्षित

दिल्ली हाई कोर्ट ने लाल किला ब्लास्ट मामले के लिंक से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में अल फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जवाद अहमद सिद्दीकी की अंतरिम जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है.

DELHI HIGH COURT

दिल्ली हाई कोर्ट ने लाल किला ब्लास्ट से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ‘अल फलाह यूनिवर्सिटी’ के संस्थापक व अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्दीकी की ओर से दायर अंतरिम जमानत याचिका पर लंबी बहस सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है. मामले की पिछली सुनवाई के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने कोर्ट के समक्ष अपना आधिकारिक जवाब सौंप दिया था.

निचली अदालत से लगा था झटका

आरोपी जवाद अहमद सिद्दीकी की ओर से दायर अंतरिम जमानत याचिका में मानवीय आधार पर गुहार लगाई गई है कि उनकी पत्नी कैंसर के चौथे स्टेज (फोर्थ स्टेज) से जूझ रही हैं और उनका गंभीर इलाज चल रहा है. पत्नी की इस नाजुक हालत की देखभाल के लिए उन्हें कम से कम 6 सप्ताह (छह हफ्ते) के लिए अंतरिम जमानत प्रदान की जाए.

इससे पहले, दिल्ली की साकेत कोर्ट ने जवाद अहमद सिद्दीकी की ओर से दायर इस अंतरिम जमानत याचिका को सिरे से खारिज कर दिया था, जिसके खिलाफ उन्होंने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया है. साकेत कोर्ट ने अपने फैसले में दलील दी थी कि मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक उनकी पत्नी की हालत फिलहाल स्थिर है, और उनकी ऐसी स्थिति नहीं है कि वे अपनी दिनचर्या से जुड़े काम खुद नहीं कर सकतीं. निचली अदालत ने यह भी कहा था कि अगर माता-पिता गंभीर बीमार पड़ते हैं, तो उनके बालिग (वयस्क) बच्चों से यह कानूनी और नैतिक उम्मीद की जाती है कि वे उनकी पूरी देखभाल करें.

415 करोड़ की धोखाधड़ी का है केस

दूसरी ओर, प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से पेश हुए विशेष वकील जोहेब हुसैन ने जवाद अहमद सिद्दीकी की अंतरिम जमानत याचिका का अदालत में पुरजोर विरोध किया और इसे तत्काल खारिज करने की मांग की. उन्होंने तकनीकी और कानूनी आधार पर कहा कि यह याचिका वर्तमान चरण में सुनवाई योग्य (मेंटेनेबल) ही नहीं है, लिहाजा इसे खारिज किया जाना चाहिए.

केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी द्वारा दाखिल मुख्य चार्जशीट (आरोप पत्र) में अल फलाह यूनिवर्सिटी के अध्यक्ष जवाद अहमद सिद्दीकी और अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट को मुख्य आरोपी बनाया गया है. अल-फलाह ग्रुप के चेयरमैन सिद्दीकी को ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) के गंभीर आरोपों में गिरफ्तार किया था. ईडी का मुख्य आरोप है कि अल फलाह ट्रस्ट द्वारा संचालित इन शिक्षण संस्थानों ने बिना किसी वैध सरकारी मान्यता और जरूरी मानकों को पूरा किए, हजारों छात्रों को भ्रामक तरीके से दाखिला (एडमिशन) दिया और उनसे अवैध रूप से भारी-भरकम फीस वसूली. सिद्दीकी पर कुल मिलाकर करीब 415 करोड़ रुपए की भारी वित्तीय धोखाधड़ी का आपराधिक मामला दर्ज है.

फर्जी NAAC और UGC मान्यता के दावे

उच्च स्तरीय सुनवाई के दौरान ईडी के वकील ने कोर्ट को विस्तार से बताया कि आरोपियों ने भोले-भाले छात्रों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए यूनिवर्सिटी को फर्जी एनएएसी (NAAC) और यूजीसी (UGC) से मान्यता प्राप्त होने के झूठे व मनगढ़ंत दावे किए थे. ईडी ने यूनिवर्सिटी प्रशासन द्वारा छात्रों से अवैध रूप से वसूली गई 415 करोड़ रुपए की पूरी फीस को ‘अपराध से अर्जित धन’ (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) घोषित किया है.

जांच एजेंसी ने इस अपराध से प्राप्त धन से फरीदाबाद के धौज क्षेत्र में स्थित अल फलाह विश्वविद्यालय की मुख्य इमारतों, विभिन्न स्कूलों, विभागों से संबंधित भवनों और हॉस्टलों (छात्रावासों) को चिन्हित कर कानूनी रूप से जब्त कर लिया है. ईडी ने कोर्ट में यह भी स्पष्ट किया कि मुख्य आरोपी सिद्दीकी ही पर्दे के पीछे से इस पूरे अवैध वित्तीय संचालन और फंड ट्रांसफर को नियंत्रित करता था.

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बचाव पक्ष ने आरोपों को बताया मनगढ़ंत; हवाला और शेल कंपनियों के नेटवर्क खंगालने में जुटी एजेंसियां
वहीं, दूसरी तरफ बचाव पक्ष की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकीलों ने जवाद अहमद सिद्दीकी के खिलाफ दर्ज की गई सभी एफआईआर (FIR) और ईडी के दावों को पूरी तरह से झूठा, आधारहीन और बदले की भावना से प्रेरित मनगढ़ंत कहानी बताया.

हालांकि, वित्तीय सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इन संबंधित संदिग्ध शेल कंपनियों का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर फर्जी लेनदेन (फेक ट्रांजैक्शंस) और अवैध हवाला कारोबार को अंजाम देने के लिए किया गया था. वर्तमान में कानून प्रवर्तन एजेंसियां अल फ़लाह ट्रस्ट और उससे जुड़े तमाम सहयोगी संस्थानों का भी पूरा वित्तीय ब्यौरा और बैंक अकाउंट्स गहराई से खंगालने में जुटी हुई हैं.



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