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दिल्ली हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के आरोपी को किया बरी, पीड़िता की गवाही पर उठे सवाल

दिल्ली हाई कोर्ट ने दुष्कर्म के एक मामले में आरोपी को बरी करने के निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया. कोर्ट ने पीड़िता की गवाही को असंगत और अविश्वसनीय बताया तथा प्राथमिकी में देरी को लेकर सवाल उठाए.

Delhi HC

दिल्ली हाईकोर्ट (प्रतीकात्मक फोटो)

दिल्ली हाई कोर्ट ने दुष्कर्म के एक मामले में आरोपी को बरी करने के निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है. अदालत ने कहा कि संबंधित अदालत ने कथित घटना के बारे में पीड़िता के बयान पर गहरा संदेह जताकर सही किया है.

जस्टिस अमित महाजन ने इसके साथ ही मार्च 2018 के निचली अदालत के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार की अपील को खारिज कर दिया है. अभियुक्त के खिलाफ आईपीसी की धारा 376 (बलात्कार) और धारा 506 (धमकी) के तहत आरोप लगाया गया था. जिसके खिलाफ सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.

पीड़िता आरोपी के कारखाने में काम करती रही

अदालत ने कहा कि यह सामान्य कानून है कि अभियुक्त को केवल शिकायतकर्ता के साक्ष्य के आधार पर दोषी ठहराया जा सकता है, जब तक कि उस साक्ष्य से विश्वास पैदा होता हो. साथ ही उसके लिए पुष्टि की आवश्यकता न हो. लेकिन शिकायतकर्ता की गवाही असंगतियों से भरी हुई है और उससे विश्वास पैदा नही होता है.

कोर्ट ने यह भी कहा कि प्राथमिकी कथित घटना के 10 दिन की देरी से दर्ज कराई गई है. अभियोजन पक्ष इसके लिए कोई उपयुक्त स्पष्टीकरण देने में विफल रहा है.= अभियोजन पक्ष के अनुसार घटना 1 अप्रैल 2015 को घटित हुई थी, फिर भी पीड़िता ने 10 अप्रैल को पुलिस को इसकी जानकारी दी थी.

वह आरोपी के कारखाने में काम करती रही, जिससे उसके आचरण पर संदेह पैदा होता है. कोर्ट ने उक्त टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकार प्रथम दृष्टया अपना आरोप साबित करने में नाकाम रही है. उससे उसे वर्तमान मामले में अपील मंजूर करने का कोई.विश्वनीय आधार नहीं मालूम पड़ता है.

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-भारत एक्सप्रेस 



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