राऊज एवेन्यू कोर्ट
दिल्ली जल बोर्ड (DJB) सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) घोटाला मामले में राऊज एवेन्यू कोर्ट से पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और आईएएस अधिकारी उदित प्रकाश राय सहित पांच आरोपियों को बड़ी राहत मिली है. अदालत ने सभी आरोपियों को 2-2 लाख रुपये के निजी मुचलके पर जमानत दे दी है.
राऊज एवेन्यू कोर्ट द्वारा दी गई जमानत और शर्तें
राऊज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली जल बोर्ड के पूर्व सीईओ उदित प्रकाश राय, नगेंद्र यादव, राज कुमार, पंकज वर्मा और अंकित श्रीवास्तव को जमानत देते हुए कुछ सख्त शर्तें निर्धारित की हैं.
- आरोपी जांच या मामले से जुड़े सबूतों के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं करेंगे.
- आरोपी गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेंगे.
- वे अदालत की पूर्व अनुमति के बिना देश छोड़कर बाहर नहीं जा सकेंगे.
सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी और ACB की दलीलें
इससे पहले इसी मामले में आप नेता और पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को भी कोर्ट से 2 लाख रुपये के निजी मुचलके पर जमानत मिल चुकी है, जिसमें देश न छोड़ने और गवाहों को प्रभावित न करने जैसी समान शर्तें थीं.
एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने इस मामले में कुल 6 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें सत्येंद्र जैन, पूर्व आईएएस अधिकारी उदित प्रकाश राय, अंकित श्रीवास्तव (तत्कालीन कॉन्ट्रैक्ट कंसल्टेंट), नागेंद्र यादव (एएन इंटरप्राइजेज के मालिक), राजा कुमार कुर्रा (यूरोटेक एनवायरनमेंट के मालिक) और पंकज वर्मा (श्रीजनहार के मालिक) शामिल हैं.
ACB का पक्ष: सुनवाई के दौरान एसीबी के वकील ने सत्येंद्र जैन को ‘आदतन अपराधी’ बताते हुए उनकी जमानत अर्जी का विरोध किया था और कहा था कि इन बिंदुओं पर विचार किया जाना चाहिए.
बचाव पक्ष का पक्ष: रोहिणी एसटीपी की क्षमता को जैन के निर्देशों पर 15-25 एमजीडी से बढ़ाकर 15-30 एमजीडी किए जाने के आरोपों पर सत्येंद्र जैन के वकील ने दलील दी थी कि आधिकारिक रिकॉर्ड इन आरोपों का समर्थन नहीं करते हैं.
1.52 करोड़ की रिश्वत के आरोप
एसीबी ने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के टेंडर में कथित गड़बड़ियों को लेकर वर्ष 2024 में एफआईआर दर्ज की थी. इस मामले में एक अहम बात यह सामने आई कि एफआईआर दर्ज होने और आरोपियों की गिरफ्तारी के बीच 27 महीने का लंबा अंतराल रहा है.
जांच का एक बड़ा हिस्सा कथित पैसों के लेन-देन से जुड़ा है. जांच अधिकारियों के मुताबिक, पूर्व सीईओ उदित प्रकाश राय तक लगभग 1.52 करोड़ रुपये की कथित रिश्वत पहुंचाए जाने के प्रमाण सामने आए हैं. इसके अलावा, प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी दिसंबर 2025 में इसी मामले से जुड़े चार एसटीपी टेंडरों को लेकर अपनी अभियोजन शिकायत (Prosecution Complaint) दाखिल की थी.
1943 करोड़ का टेंडर घोटाला
यह पूरा मामला अक्टूबर 2022 का है, जब दिल्ली जल बोर्ड ने 10 एसटीपी (सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट्स) को अपग्रेड करने के लिए चार बड़े टेंडर जारी किए थे, जिनकी कुल अनुमानित लागत लगभग 1943 करोड़ रुपये थी. आरोप है कि टेंडर की शर्तों में जानबूझकर ऐसे बदलाव किए गए जिससे ‘ईईपीएल’ (EEPL) नामक कंपनी को सीधा फायदा पहुंचाया गया.
एसीबी के अनुसार, टेंडर में ऐसी शर्तें जोड़ी गईं जिससे बाजार की प्रतिस्पर्धा (Competition) खत्म हो गई और सरकारी खजाने को भारी वित्तीय नुकसान हुआ. जांच के दौरान बिचौलियों और अधिकारियों के बीच हुई बातचीत के पुख्ता इलेक्ट्रॉनिक सबूत मिले हैं. बरामद ईमेल्स से इस बात का खुलासा हुआ है कि टेंडर के दस्तावेज तय प्रक्रिया से पहले ही चुनिंदा कंपनियों को भेज दिए गए थे.
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