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धार भोजशाला विवाद: हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में तीसरी याचिका दायर, हिंदू पक्ष ने लगाई कैविएट

मध्य प्रदेश के धार में स्थित ऐतिहासिक भोजशाला को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक और याचिका दायर की गई है. यह याचिका जिब्रान अंसारी ने दायर की है. सुप्रीम कोर्ट में अब तक तीन याचिकाएं दायर हो चुकी हैं. इससे पहले हिंदू पक्ष की ओर से कैविएट दायर की जा चुकी है, ताकि बिना पक्ष सुने स्टे न मिल सके. इससे पहले शहर के काजी, फिर कमाल मौला वेलफेयर सोसायटी और अब जिब्रान अंसारी ने याचिका दायर की है.

हाई कोर्ट का फैसला

हाई कोर्ट ने भोजशाला परिसर को हिंदू मंदिर माना था. साथ ही कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष की ओर से दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया था. कोर्ट ने यह फैसला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की रिपोर्ट के आधार पर सुनाया था. भोजशाला मामले में अदालत के फैसले में परिसर को देवी वाग्देवी के मंदिर के रूप में मान्यता दी गई है. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि मस्जिद पक्ष यदि सरकार को आवेदन देता है तो उसे अलग जमीन उपलब्ध कराई जाएगी. सरकार इंग्लैंड से वाग्देवी की प्रतिमा लाने का प्रयास करे.

ASI सर्वे रिपोर्ट और 188 स्तंभ बने फैसले का आधार

रिपोर्ट में भोजशाला परिसर के वो 188 मूल आधार स्तंभ जिनमें 106 मुख्य स्तंभ और 8 अर्द्धस्तंभ फैसले का मुख्य आधार बने. जिन पर हिंदू धर्म से जुड़े प्रतीक, देवी-देवताओं की आकृतियों और मंदिर शैली की नक्काशी मिलने का दावा किया गया. इन्हीं तथ्यों को आधार मानते हुए हाई कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है. हिंदू समुदाय भोजशाला को देवी सरस्वती को समर्पित मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष का दावा है कि 11वीं सदी का यह स्मारक कमाल मौला मस्जिद है. अदालत के आदेश पर हुए सर्वे में भी यहां मंदिर होने की पुष्टि हुई है.

ये भी पढ़ें: ‘HC ने CEC रिपोर्ट की गलत व्याख्या की…’, 93 बजरी खनन लीज मामले में सुप्रीम कोर्ट में राजस्थान सरकार की दलील

शुक्रवार के दिन पूजा-नमाज का विवाद

ऐसे में एएसआई का आदेश वैसे ही अपने आप में गलत है, लेकिन बसंत पंचमी का दिन तो मां सरस्वती की पूजा-अर्चना का दिन है. उस दिन हवन, पूजा और महाआरती जैसे जरूरी धार्मिक कर्म संकल्प से पूर्णाहुति तक बिना किसी व्यवधान के होने चाहिए. ऐसे में उस दिन नमाज की इजाजत नहीं होनी चाहिए. धार में साल 2006, 2012 और 2016 में शुक्रवार को वसंत पंचमी आई तो विवाद की स्थिति बनी. वसंत पंचमी पर हिंदू पक्ष को पूजा जबकि शुक्रवार होने से मुस्लिमों को नमाज की अनुमति है. ऐसे में वसंत पंचमी शुक्रवार को आने पर समझाइश के बाद पूजा और नमाज दोनों करवाए जाते हैं. शुक्रवार के दिन लगभग तीन हजार मुस्लिम नमाज अदा करते हैं.

गोपाल कृष्ण

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