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बिहार बालू खनन घोटाला: ED की बड़ी स्ट्राइक; पटना, दिल्ली और राजस्थान के 8 ठिकानों पर छापेमारी

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बिहार के बांका में हुए अवैध बालू खनन और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में महादेव एन्क्लेव प्राइवेट लिमिटेड और उसके नियंत्रक अशोक व राघव चंदक के बिहार, दिल्ली और राजस्थान स्थित 8 ठिकानों पर छापेमारी की है.

Enforcement Directorate ED

प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बिहार में सक्रिय बालू माफियाओं, अवैध बालू खनन और उससे जुड़े करोड़ों रुपये के मनी लॉन्ड्रिंग (धन शोधन) के मामले में एक बार फिर बेहद आक्रामक कार्रवाई की है. केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी ने इस बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ करने के लिए बिहार, देश की राजधानी दिल्ली-एनसीआर (Delhi-NCR) और राजस्थान में एक साथ कुल 8 संदिग्ध ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की है.

अशोक और राघव चंदक हैं मुख्य प्रमोटर

प्रवर्तन निदेशालय के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यह पूरी बड़ी कार्रवाई ‘मेसर्स महादेव एन्क्लेव प्राइवेट लिमिटेड’ (Mahadeo Enclave Pvt Ltd) और उससे जुड़े सहयोगियों के खिलाफ दर्ज मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में की जा रही है. कॉरपोरेट रिकॉर्ड के मुताबिक, इस मुख्य माइनिंग कंपनी का पूरा प्रशासनिक और वित्तीय नियंत्रण राजस्थान के श्रीगंगानगर (Sri Ganganagar) निवासी रसूखदार ‘चंदक परिवार’ के पास है, जिसका मुख्य रूप से नेतृत्व अशोक चंदक और उनके बेटे राघव चंदक करते हैं.

जांच एजेंसी के अनुसार, प्रारंभिक छानबीन में यह पुख्ता सबूत मिले हैं कि इस कंपनी ने बिहार के बांका जिले में बड़े पैमाने पर अवैध बालू खनन (इल्लीगल सैंड माइनिंग) को अंजाम दिया, जिसका कोई भी लेखा-जोखा राज्य के खनन विभाग (माइनिंग डिपार्टमेंट) के आधिकारिक सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज ही नहीं था.

IIT पटना की जियोस्पेशियल रिपोर्ट से खुला राज

इस बड़े घोटाले को वैज्ञानिक तौर पर प्रमाणित करने के लिए ईडी ने अक्टूबर 2024 में ‘आईआईटी पटना’ (IIT Patna) के विशेषज्ञ वैज्ञानिकों की मदद ली थी. आईआईटी पटना से बांका जिले के विभिन्न नदी घाटों का गहन ‘जियोस्पेशियल विश्लेषण’ (सैटेलाइट और रिमोट सेंसिंग मैपिंग) कराया गया था.

हाल ही में आई आईआईटी पटना की इस अत्यधिक तकनीकी और वैज्ञानिक रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला खुलासा सामने आया कि वित्तीय वर्ष 2015-16 से लेकर वित्तीय वर्ष 2022-2023 के बीच, उक्त कंपनी ने सरकारी राजस्व को भारी चूना लगाते हुए बांका के नदी घाटों से करीब 131 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की बालू का कथित रूप से अवैध रूप से खनन और उठाव किया था.

अगस्त 2025 में दर्ज हुई थी FIR

आईआईटी की रिपोर्ट से अवैध माइनिंग की पुष्टि होने के बाद, प्रवर्तन निदेशालय ने धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) की विशेष धारा 66(2) के तहत मिले कानूनी अधिकारों का उपयोग करते हुए यह अति-गोपनीय और संवेदनशील जानकारी ‘बिहार स्टेट माइनिंग कॉर्पोरेशन’ (BSMC) के साथ आधिकारिक तौर पर साझा की थी.

ईडी द्वारा मिले इन पुख्ता और अकाट्य सबूतों के आधार पर ही बिहार सरकार के खान एवं भू-तत्व विभाग ने 21 अगस्त 2025 को आरोपियों के खिलाफ एक नामजद प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई थी, जिसकी समानांतर आपराधिक जांच स्थानीय पुलिस और विभाग द्वारा की जा रही है.

मिले अहम इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य

वर्तमान में ईडी की विशेष टीमें बिहार की राजधानी पटना, दिल्ली-एनसीआर, और राजस्थान के श्रीगंगानगर तथा जयपुर सहित कुल 8 चिन्हित जगहों पर लगातार सर्च ऑपरेशन (तलाशी अभियान) चला रही हैं.

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छापेमारी की इस लाइव कार्रवाई के दौरान ईडी के अधिकारियों ने चंदक परिवार के आवासों और व्यावसायिक दफ्तरों से भारी मात्रा में बेनामी संपत्तियों के गुप्त दस्तावेज, संदिग्ध वित्तीय लेनदेन से जुड़ी डायरियां और कई महत्वपूर्ण डिजिटल व इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य (जैसे हार्ड डिस्क, मोबाइल और लैपटॉप) बरामद किए हैं. ईडी के वरिष्ठ अधिकारी और वित्तीय फॉरेंसिक विशेषज्ञ इन सभी साक्ष्यों को कब्जे में लेकर आगे की कड़ाई से जांच कर रहे हैं.



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