Bharat Express DD Free Dish
Pension Mission Shakti Digital
Pension Mission Shakti Digital

लखीमपुर खीरी हिंसा मामला: अब नए जज लोकेश राय करेंगे सुनवाई, आशीष मिश्रा केस में सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद बड़ा बदलाव

लखीमपुर खीरी हिंसा मामले की सुनवाई अब नए जिला एवं सत्र न्यायाधीश लोकेश राय करेंगे। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद मामले में जज और सरकारी वकील दोनों बदले गए हैं.

Supreme Court

लखीमपुर खीरी हिंसा मामले की अब नए जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुनवाई करेंगे. मामले में पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री अजय मिश्रा टेनी के बेटे आशीष मिश्रा मुख्य आरोपी है. जिला जज शिव कुमार सिंह के जगह अब लोकेश राय मामले में सुनवाई करेंगे. इसके लिए राय को 14 अक्टूबर को नियुक्त किया गया है.

मामले की सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर कपिल कटियार पक्ष रखेंगे. जबकि पहले प्रभाकर ब्रह्म मिश्रा राज्य सरकार का पक्ष रख रहे थे. सुप्रीम कोर्ट ने पीड़ित परिवारों की ओर से निचली अदालत के जज के आचरण को लेकर उठाई गई चिंता की इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश से जांच कर उचित कदम उठाने को कहा था. साथ ही कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से मामले में नए पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त करने का निर्देश दिया था.

इससे पहले कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से कहा था कि वे मामले की जांच करें और सुधारात्मक कदम उठाने के बाद सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट सौंपे. इससे पहले 22 सितंबर को शीर्ष अदालत ने पीड़ितों की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने उन दलीलों का संज्ञान लिया था, जिनमें उन्होंने 2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के पीठासीन अधिकारी के आचरण पर सवाल उठाए थे.

एनडीपीएस मामलों में आरोपियों को जमानत देने का लगाया आरोप

उनका आरोप था कि न्यायाधीश ने कई आपराधिक मामलों को अपने पास स्थानांतरित किया और आरोपियों को बरी कर दिया. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने लखीमपुर खीरी मुकदमे की सुनवाई के तौर तरीकों और रफ्तार पर चिंता जताई थी और गवाहों की मौजूदगी पक्की करने के लिए निर्देश दिए थे. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत भूषण ने कहा था कि कुछ बहुत परेशान करने वाली घटनाएं हुई हैं, जो मानवीय जजों की अंतरात्मा को झकझोर देंगी कि कैसे यह जज, जो अभी इस मामले को देख रहे हैं, काम कर रहे हैं. जाहिर है, उन्होंने जो किया है कि वह काफी चौंकाने वाला है, न सिर्फ इस मामले में बल्कि कई दूसरे मामले में भी.

उन्होंने एनडीपीएस के मामले खुद अपने पास ले लिए और उनमें जमानत दे दी. भूषण ने कहा कि देखिए, वे क्या करते हैं, गवाह द्वारा बीमारी की पर्ची दिए जाने के बावजूद वे गैर जमानती वारंट जारी कर देते है.

यह भी पढ़ें: सौरभ गांगुली के पर्सनालिटी राइट्स मामले में नया मोड़: दिल्ली हाई कोर्ट ने फिल्म ‘दूसरा’ के मेकर्स को भेजा नोटिस

-भारत एक्सप्रेस



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.
    Tags:

Also Read


Pension Mission Shakti Digital