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सिख विरोधी दंगों से जुड़े जनकपुरी-विकासपुरी मामले पर राउज एवेन्यू कोर्ट का फैसला सुरक्षित

1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े जनकपुरी-विकासपुरी मामले में राउज एवेन्यू कोर्ट फैसला सुरक्षित रख लिया है. अब अदालत इस मामले में 22 जनवरी को सुनवाई करेगी.

Rouse Avenue Court

1984 के सिख विरोधी दंगों से जुड़े जनकपुरी-विकासपुरी मामले में सभी पक्षों की जिरह के बाद राउज एवेन्यू कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. स्पेशल जज दिग्विनय सिंह की कोर्ट 22 जनवरी 2026 को फैसला सुनाएगा. मामले की सुनवाई के दौरान सज्जन कुमार ने अपने आप को निर्दोष बताया था. साथ ही अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज कर दिया है.

मामले की सुनवाई के दौरान सज्जन कुमार ने कहा कि मैं निर्दोष हूं और मैं कभी इस अपराध में शामिल नहीं था. उन्होंने कहा कि इस अपराध से संबंधित एजेंसी के पास मेरे खिलाफ कोई सबूत मौजूद नहीं है. उन्होंने एजेंसी पर निष्पक्ष जांच नहीं करने का भी आरोप लगाया. सज्जन कुमार ने कहा कि वो उस समय सांसद थे, उनका कोई भी नाम ले सकता था. सज्जन कुमार ने मामले में गवाह हरविंदर सिंह से पूछताछ नही करने का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि शुरू में मेरा नाम नहीं लिया गया. दशकों बाद मेरा नाम लिया गया.

पहले सुनाई जा चुकी है सजा

बता दें कि इससे पहले सज्जन कुमार को सरस्वती विहार के मामले में उम्रकैद की सजा सुनाई जा चुकी है. यह मामला सरस्वती विहार में जसवंत सिंह और उसके बेटे तरुणदीप सिंह की हत्या से जुड़ा है. कोर्ट ने 41 साल बाद इस मामले में सज्जन कुमार को दोषी करार दिया है. मामले की सुनवाई के दौरान स्पेशल पीपी ने कोर्ट को बताया था कि मामले में दोबारा जांच के बाद क्या सबूत हाथ लगा है.

क्या है मामला?

सिख विरोधी दंगों के दौरान दिल्ली के सरस्वती विहार में दो सिखों की हत्या कर दी गई थी. कोर्ट ने एक नवंबर 1984 को जसवंत सिंह और उनके बेटे तरुणदीप सिंह की हत्या से संबंधित यह मामला है. सज्जन कुमार को दिल्ली कैंट की पालम कॉलोनी में 5 सिखों की हत्या के मामले में दोषी पाया गया था. दिल्ली हाई कोर्ट ने 17 दिसंबर 2018 को उम्रकैद की सजा सुनाई. सितंबर 2023 को राउज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली के सुल्तानपुरी में 3 सिखों की हत्या के मामले में बरी कर दिया था.

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1984 में हुए थे दंगे

31 अक्टूबर 1984 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद दिल्ली में सिख विरोधी दंगे भड़क उठे. 2005 में गठित नानावटी आयोग की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली में 2733 लोगों की हत्या हुई और 587 एफआईआर दर्ज हुई. सुप्रीम कोर्ट पहले ही दिल्ली पुलिस को इन मामलों में अपील दाखिल न करने पर फटकार लगा चुका है.



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