संसद सुरक्षा उल्लंघन मामले में जेल में बंद कथित आरोपी नीलम आजाद और मनोरंजन डी की ओर से दायर जमानत याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट 7 मई को सुनवाई करेगा. जस्टिस सुब्रमण्यम प्रसाद और जस्टिस हरीश वैधनाथन शंकर की पीठ ने दिल्ली पुलिस की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल की मांग पर 7 मई तक के लिए सुनवाई को टाल दिया है. हालांकि सुनवाई टालने की मांग का याचिकाकर्ताओं की ओर से विरोध किया गया.
कहा गया है यह राज्य की देरी की रणनीति है और स्वतंत्रता के मामलों में इस तरह की देरी देश के लिए अच्छी नहीं है. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने मौखिक रूप से टिप्पणी की थी कि अगर धूम्रपान करने वाले कनस्तर का उपयोग करना आतंकवादी कृत्य है, तो हर होली और आईपीएल मैच भी युएपीए के तहत अपराध को आकर्षित करेगा.
दिल्ली पुलिस से मांगा स्पष्ट जवाब
कोर्ट ने दिल्ली पुलिस से यह स्पष्ट करने के लिए कहा था कि क्या धूम्रपान करने.वाले कनस्तर को जे जाना या उसका उपयोग करना, जो घातक नहीं है. युएपीए के तहत आतंकवादी कृत्य के अपराध के अंतर्गत आता है.
बता दें कि 2001 के संसद आतंकवादी हमले की सालगिरह पर एक बड़े सुरक्षा उल्लंघन में, दो लोग सार्वजनिक गैलरी से लोकसभा के कक्ष में कूद गए, जब शून्यकाल चल रहा था. दोनों की पहचान सागर शर्मा और मनोरंजन डी के रूप में हुई. सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीरों और वीडियो में दोनों को पीले रंग की गैस छोड़ने वाले कनस्तर पकड़े हुए देखा गया. वे नारे भी लगा रहे थे.
हालांकि कुछ सांसदों ने उन्हें काबू में कर लिया. अमोल शिंदे और नीलम आजाद के रूप में पहचाने गए दो अन्य आरोपियों ने भी संसद परिसर के बाहर इसी तरह के कनस्तरों से रंगीन गैस का छिड़काव किया. वे कथित तौर पर तानाशाही नहीं चलेगी के नारे लगा रहे थे.
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-भारत एक्सप्रेस
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