दिल्ली के सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसा मामले में गिरफ्तार आरोपी और बिल्डिंग के मालिक हरिराम गुप्ता को पटियाला हाउस कोर्ट से झटका लगा है. कोर्ट ने गुप्ता को मेडिकल ग्राउंड पर जमानत देने से इनकार कर दिया है.
मामले की सुनवाई के दौरान हरिराम गुप्ता के वकील ने कोर्ट को बताया कि उनकी उम्र 80 साल है और वो बीमारियों से ग्रसित है, लिहाजा उनको मेडिकल ग्राउंड पर जमानत प्रदान की जाए. लेकिन कोर्ट ने गुप्ता के वकील की इस दलील को खारिज करते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया है. इससे पहले दिल्ली पुलिस ने हरिराम गुप्ता के जमानत का विरोध किया था. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालेर की कोर्ट ने यह फैसला सुनाया है.
इस हादसे में सात लोगों की मौत हो गई थी. जांच रिपोर्ट के मुताबिक गुप्ता के परिवार ने इमारत बनाते समय सुप्रीम कोर्ट के दिशा निर्देशों का पालन नही किया था. उन्होंने बिना अनुमति के इमारत का इस्तेमाल व्यायावसायिक कामों के लिए किया. इससे पहले भी कोर्ट से हरिराम गुप्ता की ओर से दायर जमानत याचिका को खारिज हो चुका है.
कोर्ट ने जेल अधीक्षक को निर्देश दिया था कि गुप्ता को डॉक्टर की सलाह के मुताबिक सभी जरूरी दवाएं बिना किसी देरी के मुहैया कराए. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि मामले की जांच अभी चल रही है और अभी तक चार्जशीट दाखिल नही हुआ है. दिल्ली पुलिस के मुताबिक बिल्डिंग का बिजली कनेक्शन हरिराम गुप्ता के नाम पर था, जबकि मैनेजमेंट बेटा महेश गुप्ता संभाल रहा था.
उर्मिला गुप्ता के नाम थी प्रॉपर्टी
प्रॉपर्टी हरिराम की पत्नी उर्मिला गुप्ता के नाम पर रजिस्टर्ड थी. 6 सितंबर को सत्य निकेतन इलाके में बनाई गई पांच मंजिला मकान गिरने से 7 लोगो की मौत हो गई थी, जिनमें पांच छात्र थे. जबकि चार अन्य घायल हुए है. इस बिल्डिंग में हॉस्टल डेज की पीजी चल रही थी. इसके बाद पुलिस ने बिल्डिंग के मालिक हरिराम गुप्ता, उनकी पत्नी उर्मिला और बेटे महेश गुप्ता को गिरफ्तार किया गया.
पुलिस मामले में इमारत के निर्माण, उसके प्रबंधन और हादसे से जुड़ी अन्य परिस्थितियों की जांच कर रही है.
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इमारत में निर्माण या मरम्मत से जुड़े नियमों का पालन किया गया था या नही. वही इसी मामले की जांच की मांग को लेकर दायर याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट सुनवाई कर रहा है. मामले की सुनवाई के दौरान हादसे को बेहद दुखद बताया था. कोर्ट ने कहा इससे दुखद कुछ नही हो सकता. कोर्ट ने कहा था, पीड़ितों के माता-पिता की भावनाओं को समझा जा सकता है.
कोर्ट ने कहा था कि जिम्मेदारी से कोई नही बच सकता है. कोर्ट ने पीड़ितों के वीडियों को सोशल मीडिया पर शेयर करने पर नाराजगी जताई थी. कोर्ट ने कहा था वीडियो शेयर करना सही नही है. साथ ही कोर्ट ने भविष्य में ऐसे हादसे रोकने के लिए ठोस कदम उठाने को कहा था.
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-भारत एक्सप्रेस
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