बिहार एसआईआर को लेकर दायर विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से आधार को 12 वें दस्तावेज के तौर पर स्वीकार करने का निर्देश दिया है. कोर्ट ने कहा कि आधार की प्रमाणिकता और वास्तविकता की जांच करने का अधिकार अधिकारियों को रहेगा. कोर्ट ने कहा कि इसे नागरिकता के प्रमाण के रूप में स्वीकार नही किया जाएगा. चुनाव आयोग आज निर्देश जारी करेगा. आयोग इस आदेश की जानकारी अपनी वेबसाइट पर सार्वजनिक करेगी. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने यह निर्देश दिया है. कोर्ट 15 सितंबर को इस मामले में अगली सुनवाई करेगा.
मामले में सुनवाई के दौरान आरजेडी की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि आधार दस्तावेज के तौर पर मान्य है या नही, मुद्दा यह है. सिब्बल ने कहा नागरिकता बीएलओ तय नही कर सकता. सिब्बल ने यह भी कहा कि 11 दस्तवेज़ों के अलावे आधार को भी शामिल किया जाए. कोर्ट ने सिब्बल से पूछा कि क्या आप चाहते हैं कि आधार को नागरिकता के सबूत के रूप में स्वीकार किया जाए ?
सिब्बल ने कहा कि इस अदालत के तीन आदेश हैं. जिनमें कहा गया है कि आधार स्वीकार किया जाए. इसको लेकर खुद बीएलओ का बयान है, जिस बयान में कहा गया है कि आधार स्वीकार नही किया जा सकता. चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि हम आधार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक और कानून के मुताबिक स्वीकार कर रहे हैं. लेकिन उसे नागरिकता का प्रमाण नही मान रहे हैं. सिब्बल ने कहा कि कोर्ट के निर्देश के बावजूद आधार को स्वीकार न करके बीएलओ अवमानना कर रहे है.
सिब्बल ने दावा किया है कि बीएलओ ने 11 दस्तवेज़ों से बाहर अन्य दस्तावेज स्वीकार करने पर नोटिस जारी किए हैं. इसपर कोर्ट ने सिब्बल को शो कॉज नोटिस पेश करने को कहा. जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि कानून स्पष्ट है, आधार एक आधिकारिक दस्तावेज है और चुनाव आयोग को इसे देखना होगा. सिब्बल ने मांग की कि आधार को 12 वां वैध दस्तावेज शामिल किया जाए.
वही जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि अधिनियम में आधार को निवास प्रमाण के रूप में स्पष्ट रूप से मान्यता दी गई है. चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि हम पासपोर्ट की तरह आधार को स्वीकार नही कर सकते है. कोर्ट ने कहा कि जब विधायी स्थितियों में आधार है तो आप उस परिधि को लांघ नही सकते है. आयोग के वकील ने 11 दस्तवेज़ों पर जोर दिया है. हर व्यक्ति ये दस्तावेज प्रस्तुत कर सकता है. यह आधार का मामला सिर्फ पहचान के लिए है.
जस्टिस बागची ने कहा कि चुनाव आयोग की पहचान नियमावली में दस्तावेजों का जिक्र है, लेकिन आपने एसआईआर में इससे आगे बढ़कर काम किया है. आप अपनी समावेशी भूमिका के प्रति सचेत हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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