यमन में मौत की सजा पाने वाली केरल की नर्स निमिषा प्रिया की मौत की सजा के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट 14 जुलाई को सुनवाई करेगा. जस्टिस सुधांशू धुलिया और जस्टिस जोयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता के वकील ने मेंशनिंग कर जल्द सुनवाई की मांग की थी. निमिषा प्रिया केरल के पलक्कर की रहने वाली है. इससे पहले निमिषा की मां प्रेमकुमारी दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटा चुकी है.
मालूम हो कि यमन की शीर्ष अदालत ने निमिषा प्रिया की फांसी की सजा बरकरार रखी है. निमिषा प्रिया को 2017 में यमन के एक नागरिक की हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था.
केंद्र सरकार के प्रयास के बावजूद नहीं मिली राहत
मामला कूटनीतिक जटिलताओं और कानूनी पेचीदगियों के कारण उलझ हुआ है. केंद्र सरकार के प्रयास के बावजूद कोई सफलता हाथ नही मिली है.
यमन की मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक निमिषा प्रिया को 16 जुलाई को फांसी दे दी जाएगी. हालांकि निमिषा के पति टामी थामस का कहना है कि, हमें अभी तक कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली है. हमे इस बारे में केवल समाचार रिपोर्टों के माध्यम से पता चला है. प्रिया को 2018 में अपने यमनी बिजनेस पार्टनर की हत्या का दोषी ठहराया गया था. तब से वह सना की केंद्रीय जेल में मौत की सजा काट रही हैं. पति परिवार के अलावा, निमिषा की बचपन की दोस्त विनीता राधाकृष्णन भी उनके साथ लंबी प्रार्थना कर रही हैं.
हुतियों के कब्जे वाले इस देश में सजा का प्रावधान एक ही है. वहां पर दोषी को गोली मार दी जाती है. वैसे यमन के कानून में दोषी को पत्थर मार कर जान लेना, सरेआम फांसी पर लटकाना और सिर कलम करने जैसी सजा दी जा सकती है.
बता दें कि निमिषा प्रिया नर्सिंग ट्रेनिंग कोर्स पूरा करने के बाद 2011 में यमन चली गई थी. वह अपने माता-पिता को अच्छी जिंदगी देने के लिए वहां गई थी. उनके माता-पिता दिहाड़ी मजदूर थे. प्रिया ने कई अस्पतालों में काम किया. इसके बाद खुद का क्लीनिक खोलने का फैसला किया. वह 2014 में तलाल अब्दो महदी के संपर्क में आई थी. तलाल ने निमिषा को यमन में क्लीनिक शुरू करने में उनकी मदद का वादा किया. उसको लगा कि जो उसने सपना देखा है वह सच होने वाला है.
भारत एक्सप्रेस
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