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उत्तराखंड न्यायिक सेवा परीक्षा में दृष्टिबाधित उम्मीदवार को शामिल न करने के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब

उत्तराखंड न्यायिक सेवा परीक्षा में दृष्टिबाधित अभ्यर्थी को बाहर रखने पर सुप्रीम कोर्ट ने आयोग से जवाब तलब किया है. कोर्ट ने इसे गंभीर चूक माना और PwBD आरक्षण पर सवाल उठाए.

Supreme Court

उत्तराखंड न्यायिक सेवा परीक्षा में दृष्टिबाधित उम्मीदवार को शामिल न करने के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड लोक सेवा आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की पीठ ने यह नोटिस जारी किया है. यह याचिका वकील विक्रम हेगड़े के माध्यम से दायर की गई हैं. यह याचिका 100 % दृष्टिबाधित उम्मीदवार ने दायर की है.

दायर याचिका में उत्तराखंड न्यायिक सेवा परीक्षा में भाग लेने की अनुमति मांगी है. दायर याचिका में दृष्टिहीनता, अंग विकलांगता तथा उत्तराखंड के गैर- निवासियों को PWBD आरक्षण से बाहर करने की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई है.

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील अंचला भाटेला ने कहा कि उत्तराखंड न्यायिक सेवा की भर्ती के लिए 16 मई 2025 को जारी विज्ञापन PWBD कोटे के तहत सिर्फ चार प्रकार की दिव्यांगता-कुष्ठ रोग से ठीक हुए व्यक्ति, तेजाब हमले के पीड़ित और मांसपेशीय अपविकास तक सीमित है, जबकि दृष्टिबाधित सहित अन्य दिव्यांगताओं को बाहर कर दिया गया है.

इस पर पारदीवाला ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह बहुत गलत है, सरकार की ओर से यह गंभीर चूक है. 31 अगस्त से परीक्षा शुरू होने वाला है. याचिका में PwBD के लिए आरक्षित पदों की नए सिरे से पहचान करने और RPwD अधिनियम 2016 की धारा 34, RPwD नियमों के नियम 11 तथा केंद्र सरकार द्वारा जारी दिशा निर्देशों का पालन करने का निर्देश देने की मांग की है


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भारत एक्सप्रेस



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