लखीमपुर खीरी (Lakhimpur Kheri) हिंसा मामले के मुख्य आरोपी और पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा ‘टेनी’ के बेटे आशीष मिश्रा को सर्वोच्च न्यायालय (सुप्रीम कोर्ट) से कोई अतिरिक्त राहत नहीं मिली है. शीर्ष अदालत ने आशीष मिश्रा की जमानत की सख्त शर्तों में ढील देने से साफ इनकार करते हुए स्पष्ट किया है कि यदि वे किसी भी तरह के संशोधन या अतिरिक्त राहत की मांग करना चाहते हैं, तो इसके लिए उन्हें सबसे पहले संबंधित निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) का दरवाजा खटखटाना होगा.
माननीय मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की तीन सदस्यीय विशेष खंडपीठ इस संवेदनशील मामले की सुनवाई कर रही है. मामले की सुनवाई के दौरान आशीष मिश्रा की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील ने कोर्ट को अवगत कराया था कि वर्तमान में लागू जमानत की कड़ी शर्तों के कारण आशीष मिश्रा किसी भी पारिवारिक कार्यक्रम में शामिल नहीं हो पा रहे हैं और न ही अपनी बेटियों के जन्मदिन के जश्न में हिस्सा ले पा रहे हैं. हालांकि, सीजेआई सूर्यकांत की पीठ ने साफ किया कि इस स्तर पर सुप्रीम कोर्ट जमानत की पूर्व-निर्धारित शर्तों में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगा और याचिकाकर्ता को अपनी इन शिकायतों व जरूरतों को पहले ट्रायल कोर्ट के समक्ष ही रखना चाहिए.
दूसरी ओर, पीड़ितों का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने मुकदमे (ट्रायल) के चलने के तरीके और उसकी गति पर गंभीर चिंता जताई. उन्होंने कोर्ट में सीधा आरोप लगाया कि मामले के कई बेहद अहम गवाहों, जिनमें प्रत्यक्षदर्शी (चश्मदीद) गवाह भी शामिल हैं, को जांच एजेंसियों द्वारा छोड़ा जा रहा है. इस पर प्रतिक्रिया देते हुए सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि इस तरह की प्रक्रियात्मक शिकायतें और आपत्तियां भी सबसे पहले ट्रायल कोर्ट के समक्ष ही आधिकारिक रूप से उठाई जानी चाहिए.
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया गया कि गवाहों को डराने-धमकाने के मामले में दर्ज की गई प्राथमिकी (FIR) में आशीष मिश्रा और पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय मिश्रा का नाम चार्जशीट में शामिल नहीं है. उत्तर प्रदेश पुलिस (UP Police) द्वारा कोर्ट में पेश की गई जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि गवाह को डराने-धमकाने के आरोपों वाली एफआईआर की जांच अब पूरी हो चुकी है. जांच में आशीष मिश्रा, उनके पिता अजय मिश्रा या अन्य प्रमुख लोगों की इस साजिश में संलिप्तता का कोई भी प्रमाण नहीं मिला है. रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में केवल अमनदीप सिंह के खिलाफ अलग से चार्जशीट फाइल की गई है, जिस पर संबंधित अदालत ने संज्ञान भी ले लिया है.
उल्लेखनीय है कि गवाहों को डराने-धमकाने के इस विशिष्ट आरोप में यूपी पुलिस ने पिछले साल अक्टूबर में एफआईआर दर्ज की थी. यह कार्रवाई तब हुई थी जब सुप्रीम कोर्ट ने शिकायतकर्ता बलजिंदर सिंह की अर्जी पर कार्रवाई न करने के लिए पुलिस की कड़ी खिंचाई की थी.
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बलजिंदर सिंह ने आरोप लगाया था कि उन पर अपना आधिकारिक बयान वापस लेने के लिए भारी दबाव बनाया गया और धमकियां दी गईं. पुलिस की उस पुरानी दलील को खारिज करते हुए, जिसमें कहा गया था कि गवाह खुद बयान दर्ज कराने सामने नहीं आया, सुप्रीम कोर्ट ने एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को सीधे शिकायतकर्ता के पास जाकर बयान दर्ज करने का सख्त निर्देश दिया था. इसके बाद लखीमपुर के सहायक पुलिस अधीक्षक (ASP) ने पंजाब के श्री मुक्तसर साहिब में जाकर शिकायतकर्ता का पता लगाया था और उनका आधिकारिक बयान दर्ज किया था. अब कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट को प्रक्रिया जारी रखने का निर्देश दिया है.
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