बिहार एसआईआर मामले में दायर विभिन्न याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट 8 सितंबर को सुनवाई करेगा. कोर्ट ने बिहार सीईओ को आदेश दिया है कि वो राजनीतिक दलों के अध्यक्ष और महासचिवों को नोटिस जारी करें कि वो इस मसले पर अदालत के आदेश पर स्टेट्स रिपोर्ट दाखिल करें. जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की अध्यक्षता वाली पीठ सुनवाई कर रही है. कोर्ट ने कहा कि अगली सुनवाई में 12 राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि को कोर्ट में मौजूद रहने को कहा है. सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि कोर्ट के आदेश के बाद हलफनामा दाखिल कर कहा है कि लगभग 65 लाख छुटे हुए लोगों की सूचि बुधवार को प्रकाशित कर दी गई है.
बिहार के सभी 38 जिला निर्वाचन अधिकारियों की वेबसाइट पर विवरण प्रकाशित कर दिया गया है. ड्राफ्ट मतदाता सूची में नाम शामिल न होने का कारण भी प्रकाशित कर दिए गए हैं. जिनमें मृत्यु, निवास स्थान में बदलाव, या डुप्लिकेट एंट्री शामिल है. चुनाव आयोग के वकील ने यह भी बताया कि सोशल मीडिया पर भी जानकारी दी गई है. यह भी बताया गया है कि 65 लाख लोग डिजिटल रूप से संपर्क कर सकते हैं और आधार कार्ड जमा करा सकते हैं.
जस्टिस सूर्यकांत ने पूछा कि कितनी राजनीतिक पार्टियों ने शिकायत दर्ज कराई है. इसपर आयोग के वकील ने कहा कि सांसदों ने शिकायत दर्ज कराई है पार्टियों ने नही. कोर्ट ने कहा कि हम आश्चर्यचकित हैं कि 1.6 लाख बीएलए राजनीतिक दलों के हैं और उनकी तरफ से आपत्तियां सामने नही आ रही है वे आपत्तियां और दावे करें. हरेक वोटर का अधिकार है कि वो।मतदाता बनने का आवेदन करें और आपत्तियां भी दर्ज कराए. इन वोटरों की सहायता 12 राजनीतिक दलों द्वारा किया जाना चाहिए.
प्रशांत भूषण ने आयोग पर लगाया गंभीर आरोप
सुनवाई के दौरान एडीआर की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि समस्या यह है कि आयोग पुराने वोटर जिनको हटाया गया है, उनसे फॉर्म 6 भरवा रहा है. आधार के साथ स्पष्टीकरण ले रहा है. जबकि फॉर्म 6 सिर्फ नए वोटर जोड़ने के लिए है और फॉर्म 8 पुराने के लिए हैं. जिसका चुनाव आयोग के वकील के खंडन करते हुए कहा कि भूषण गलतबयनबाजी कर रहे है. आयोग के वकील ने कोर्ट से इंतजार करने को कहा. उन्होंने कहा कि कोर्ट आयोग को काम करने दे. इन बोगस स्टोरी पर विश्वास न करें.
याचिकाकर्ता के वकील वृंदा ग्रोवर ने कहा कि यह समस्या 65 लाख लोगों से परे है. उन्होंने कहा कि पत्रकार कह रहे है किलोगों ने बताया है कि चुनाव आयोग आधार के अलावे अन्य दस्तावेजों पर जोर दे रहे है. जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि हमें तो बस राजनीतिक दलों की निष्क्रियता पर आश्चर्य है. बीएलए नियुक्त करने के बाद वे क्या कर रहे है. इसपर चुनाव आयोग ने कहा कि इसे चुनाव आयोग पर छोड़ दीजिए, हम कर रहे हैं. कोर्ट ने कहा कि हम आश्चर्यचकित हैं, राजनीतिक दल द्वारा सहयोग न करने को लेकर. कोर्ट ने कहा कि पूरी प्रक्रिया वोटर फ्रेंडली है और हम देख रहे हैं कि क्या हो रहा है. चुनाव आयोग ने कहा कि एडीआर समेत कोई भी राजनीतिक दल आगे नहीं आ रहा और यहां पर बिना किसी आधार के आरोप लगा रहे है.
इसपर राजनीतिक दल के वकील ने कहा कि वेबसाइट पर यह स्पष्ट होना चाहिए कि किसने कौन सा दस्तावेज दिया और अगर उसे रिजेक्ट किया गया तो क्यों किया गया. यह शामिल होना चाहिए.
भारत एक्सप्रेस
इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.
