सुप्रीम कोर्ट ने बसों की ओवरलोडिंग के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया है. सीजेआई बी आर गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि संविधान के अन्य अंग भी काम कर रहे है. हर मामले अदालत के समक्ष नही आनी चाहिए. साथ ही कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अपनी मांगों को लेकर सरकार के पास जाने का निर्देश दिया है. यह याचिका वकील संगम लाल पांडेय की ओर से दायर की गई थी.
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कोर्ट से कहा कि यह अहम मुद्दा है, हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है. कोर्ट ने कहा दायर याचिका में बसों की ओवरलोडिंग से लोगों के जीवन को हो रहे खतरे को आधार बनाया गया था.
दायर याचिका में कहा गया था कि वह मोटर व्हीकल एक्ट 1988 और सेंट्रल मोटर व्हीकल अधिनियम 1989 के पालन की मांग की गई थी. पूरे देश में बेरोकटोक यात्री बसों में अधिक वजन ढोया जा रहा है. इसके अलावा बसों में भीड़भाड़ नियंत्रण के लिए दिशा निर्देश जारी करने की मांग की गई थी.
याचिका में कहा गया था कि बसों में यात्रियों का सामान रखने के लिए तय नियमों के परे जाकर व्यापारिक सामान भी रखा जा रहा है. इसके लिए छतों पर कैरियर लगाए जाते है. याचिकाकर्ता के मुताबिक निजी बसों में 16 से 18 टन वजन की अनुमति होती है लेकिन 40 से 45 टन वजन ढोया जाता है. छत पर सामान रखने से बस की ऊंचाई भी बढ़ जाती है.
ये भी पढ़ें- OBC Reservation: तेलंगाना सरकार को सुप्रीम कोर्ट से झटका, ओबीसी आरक्षण बढ़ाने पर लगी रोक जारी
Also Follow Bharat Express on Youtube
-भारत एक्सप्रेस
PM Modi Navratri: नवरात्र के छठे दिन के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर…
CM Yogi: यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि पिछले साढ़े 9 वर्षों…
Delhi News: कनॉट प्लेस प्रदर्शन पर दिल्ली पुलिस का बड़ा बयान, सुरक्षा और त्योहारी सीजन…
Punjab Drug Problem: पंजाब और सीमावर्ती राज्यों में नशे की समस्या जटिल और बहुस्तरीय है.…
Amit Shah Gujarat Visit: केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह शुक्रवार को गुजरात में…
IMD Weather Alert Today: बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव और चक्रवाती परिसंचरण के चलते…