अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू की आने वाले समय में बढ़ सकती है मुश्किलें. सुप्रीम कोर्ट ने खांडू के रिश्तेदारों के स्वामित्व वाली कंपनियों को सार्वजनिक अनुबंधों के कथित अनियमित आवंटन की सीबीआई या एसआईटी से जांच कराने की मांग वाली याचिका पर जुलाई में सुनवाई करेगा. मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि हालात चौकाने वाले है. राज्य को एक प्राइवेट कंपनी की तरह चलाया जा रहा है. सभी ठेके उनकी पत्नी की कंपनी, उनके चचेरे भाई की कंपनी आदि को दिए गए हैं.
कोर्ट ने CAG जांच का दिया आदेश
वही अरुणाचल प्रदेश सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि याचिका प्रक्रिया का दुरुपयोग मात्र है. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सीएजी जांच का आदेश दिया था. सीएजी ने अपनी रिपोर्ट कोर्ट को सौप दिया है. सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अरुणाचल प्रदेश वह सब कुछ कर रहा है जो कर सकता है, और यह कानून के तहत है. यह भी कहा गया कि यह याचिका राजनीति से प्रेरित है. याचिकाकर्ता कुछ लोगों का समूह है, जो राज्य में विकास नही चाहते है.
भूषण ने कहा कि सैकड़ों करोड़ का मामला है. कोर्ट ने भूषण से पूछा कि कितने अनुबंध है, जिस पर भूषण ने कहा कि अपनी पत्नी की कंपनियों को सैकड़ों करोड़ के 70 अनुबंध है. पेमा खांडू के करीबी सहयोगियों को चाबी निविदाएं देने में कथित पक्षपात किया गया, जिसमें खांडू की पत्नी से संबंधित निर्माण कंपनी मेसर्स ब्रांड ईगल्स भी शामिल है. इसके अलावे पेमा के भतीजे श्री त्सेरिंग ताशी, जो तवांग जिले के विधायक हैं, जो मैसर्स एलायंस ट्रेडिंग कंपनी के मालिक है, को उचित प्रक्रिया का पालन किए बिना कार्य संविदा प्रदान की गई है.
-भारत एक्सप्रेस
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