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वर्दीधारी असहज स्थिति में भी कर्तव्य से विमुख नहीं हो सकता: दिल्ली हाईकोर्ट

Delhi High Court ने सीआईएसएफ उपनिरीक्षक की याचिका खारिज करते हुए कहा कि वर्दीधारी सेवा में उतार-चढ़ाव का सामना करने के लिए तैयार रहें और असहज स्थिति में भी अपने कर्तव्यों से विमुख नहीं हो सकते.

दिल्ली हाईकोर्ट

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Delhi High Court ने कहा कि वर्दी वाले सेवा में शामिल होने वाला व्यक्ति असहज स्थिति का सामना करने पर अपने कर्तव्य से विमुख नहीं हो सकता है. अदालत सी. हरिशंकर एवं जस्टिस ओम प्रकाश शुक्ला की पीठ ने कहा कि सेवा में उतार-चढ़ाव जीवन का एक हिस्सा है. वर्दी वाले सेवा में शामिल होने वाले को इन परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए.

वह असहज स्थिति में होने पर या ऐसी स्थिति का सामना करने पर जो उसे स्वीकार्य नहीं है, अपने कर्तव्य से विमुख नहीं हो सकता है. अदालत ने यह टिप्पणी करते हुए केंद्रीय औधौगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के एक उपनिरीक्षक की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उसने वर्ष 2011 में बिना अनुमति के अनुपस्थिति होने के बाद उसे सेवा से हटा दिया गया था. उसने जांच की कार्यवाही में भाग नहीं लिया था.

अदालत ने उसकी याचिका खारिज करते हुए कहा कि वह उसका सहायता नहीं कर सकता, क्योंकिं वह बिना किसी औचित्य के दस महीने से अधिक समय तक सेवा से अनुपस्थित रहा था. उसके असहयोगात्मक रवैया इस बात से जाहिर होता है कि उसने चार्जशीट के बाद कि जांच कार्यवाही में कभी भी पेश नही हुआ.

इस स्थिति में हमारा मानना है कि यह मामला उन उच्च श्रेणी के मामलों में नहीं आता, जिनमें हस्तक्षेप किया जा सके. ऐसी दशा में याचिका में मांगी गई राहत देने का कोई मामला नहीं बनता है.

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-भारत एक्सप्रेस 



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