Valley of Flowers Uttarakhand
Valley of Flowers Uttarakhand: अगर आप इस भीषण गर्मी में प्रकृति की गोद में सुकून के पल बिताना चाहते हैं, तो आपके लिए एक शानदार खबर है. उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित विश्व प्रसिद्ध ‘फूलों की घाटी’ (Valley of Flowers) पर्यटकों के लिए खोल दी गई है. समुद्र तल से करीब 12,992 फीट की ऊंचाई पर मौजूद यह घाटी किसी धरती के स्वर्ग जैसी नजर आती है. हर साल की तरह इस बार भी देश-विदेश से आने वाले सैलानी अक्टूबर के अंत तक यहाँ की खूबसूरत वादियों और रंग-बिरंगे फूलों का दीदार कर सकेंगे. प्रशासन ने पर्यटकों की सुविधा और सुरक्षा के लिए सभी जरूरी इंतजाम पूरे कर लिए हैं.
UNESCO: 5 हजार से ज्यादा फूलों की प्रजातियां
गढ़वाल क्षेत्र में स्थित यह घाटी अपनी खास जैव-विविधता के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती है. यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर सूची में शामिल इस घाटी में फूलों की 5 हजार से भी ज्यादा प्रजातियां पाई जाती हैं. यहाँ उत्तराखंड का राजकीय पुष्प ‘ब्रह्मकमल’ भी खिलता है, जिसे देखना अपने आप में एक अनोखा अनुभव है. इसके अलावा सैलानियों को यहाँ एनीमोन, जेरेनियम, प्राइमुलस, ब्लू पोस्पी और ब्लूबेल जैसे अत्यंत दुर्लभ और खूबसूरत फूल देखने को मिलते हैं. पूरी घाटी करीब 87.50 वर्ग किलोमीटर के दायरे में फैली हुई है, जो इस मौसम में रंग-बिरंगे फूलों की चादर से ढक जाती है.
तितलियां, दुर्लभ पक्षी और वन्यजीवों का बसेरा
फूलों की घाटी सिर्फ वनस्पतियों के लिए ही नहीं, बल्कि दुर्लभ जीव-जंतुओं के लिए भी एक सुरक्षित घर है. यहाँ आने वाले पर्यटकों को रंग-बिरंगी तितलियां, कस्तूरी मृग, हिम तेंदुआ, नीली भेड़ और काले भालू जैसे दुर्लभ वन्यजीव भी देखने को मिल सकते हैं. पक्षी प्रेमियों के लिए भी यह जगह किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि यहाँ हिमालयी पक्षियों की चहचहाहट हर पल गूंजती रहती है.
कैसे पता चला इस जादुई जगह का?
इस खूबसूरत घाटी को दुनिया के सामने लाने का श्रेय ब्रिटिश पर्वतारोही और वनस्पतिशास्त्री फ्रैंक एस. स्मिथ को जाता है. उन्होंने साल 1931 में इस घाटी को खोजा था. स्मिथ यहाँ की खूबसूरती से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने इस पर एक किताब भी लिख डाली. तब से लेकर आज तक यह जगह दुनिया भर के प्रकृति प्रेमियों और ट्रैकर्स के लिए पहली पसंद बनी हुई है.
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यात्रा से जुड़ी कुछ जरूरी बातें
अगर आप फूलों की घाटी जाने का प्लान बना रहे हैं, तो आपको चमोली जिले के गोविंदघाट तक गाड़ी से पहुंचना होगा. इसके बाद घांघरिया बेस कैंप से आगे की खड़ी चढ़ाई पैदल तय करनी होती है. इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने और पर्यावरण को बचाने के लिए वन विभाग यहाँ प्लास्टिक के इस्तेमाल पर सख्त पाबंदी रखता है. इसके साथ ही उत्तराखंड में चारधाम यात्रा भी पूरे जोर-शोर से चल रही है, जिसके तहत केदारनाथ की प्रसिद्ध ‘ध्यान गुफा’ के लिए भी बुकिंग तेजी से फुल हो रही है.
भारत एक्सप्रेस
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