पूर्वी उत्तर प्रदेश में आयोजित तीन दिवसीय गाजीपुर लिटरेचर फेस्टिवल (GLF 2025) का आज भव्य समापन हुआ. वाराणसी के होटल द क्लार्क्स से प्रारंभ होकर गाजीपुर की ऐतिहासिक धरती पर आयोजित इस साहित्यिक उत्सव ने साहित्य, संस्कृति, भारतीय चेतना और स्वतंत्रता के मूल्यों पर गहन संवाद का अनुपम मंच प्रदान किया.
तीसरे दिन का समापन सत्र ‘स्वतंत्रता संग्राम और सैन्य पराक्रम में गाजीपुर की भूमिका’ पर केंद्रित रहा, जहां भारत एक्सप्रेस समूह के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर (CMD) तथा एडिटर-इन-चीफ उपेंद्र राय ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की. उनके प्रेरणादायी संबोधन ने श्रोताओं के दिलों को छू लिया, जबकि तीन विशिष्ट हस्तियों को सम्मानित कर फेस्टिवल को यादगार बनाया.
गाजीपुर लिटरेचर फेस्टिवल के अंतिम सत्र में मंच पर CMD उपेंद्र राय के साथ डॉ. आनंद प्रधान, समीर चटर्जी, मनोज राय और अभिनव अरुण जैसे प्रमुख वक्ता उपस्थित रहे. इनके अलावा, गाजीपुर की पावन धरती पर जन्मे प्रसिद्ध अभिनेता अंजन श्रीवास्तव – जिन्होंने दूरदर्शन के लोकप्रिय सीरियल ‘वागले की दुनिया’ से अपनी अमिट पहचान बनाई-और एनजीओ ‘गूंज’ के संस्थापक अंशु गुप्ता भी मंच की शोभा बढ़ा रहे थे. अंजन श्रीवास्तव की उपस्थिति ने स्थानीय दर्शकों में खास उत्साह जगाया, क्योंकि वे गाजीपुर के गौरव का जीवंत प्रतीक हैं. वहीं, अंशु गुप्ता ने सामाजिक कार्यों के माध्यम से साहित्य और सेवा के मेल पर प्रकाश डाला.
CMD उपेंद्र राय ने सत्र की शुरुआत में अंजन श्रीवास्तव और अंशु गुप्ता का विशेष रूप से अभिनंदन किया. उन्होंने कहा, “गाजीपुर की धरती पर आकर इन दोनों ने GLF में सहभागिता की, इसके लिए दिल की गहराईयों से इन दोनों का ढेरों शुक्रिया.” उन्होंने आगे जोर देकर कहा कि ऐसे हस्तियां न केवल साहित्यिक चर्चाओं को समृद्ध करती हैं, बल्कि युवा पीढ़ी को प्रेरणा भी प्रदान करती हैं.
CMD उपेंद्र राय ने इस अवसर पर तीन अतिथियों को सम्मानित किया— इनमें डॉ. आनंद प्रधान, समीर चटर्जी और अभिनव अरुण शामिल थे. प्रत्येक को स्मृति चिन्ह भेंट कर उनकी साहित्यिक और सामाजिक योगदान की सराहना की गई. डॉ. आनंद प्रधान ने गाजीपुर के स्वतंत्रता संग्राम में स्थानीय नायकों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की, जबकि समीर चटर्जी ने सैन्य इतिहास के अनसुने प्रसंग साझा किए. अभिनव अरुण ने आधुनिक संदर्भ में गाजीपुर की सांस्कृतिक विरासत को जोड़ते हुए श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया.
CMD उपेंद्र राय का संबोधन सत्र का सबसे भावुक और प्रेरक हिस्सा साबित हुआ. उन्होंने ‘आजादी’ की अवधारणा को केवल राजनीतिक या भौतिक मुक्ति तक सीमित न रखते हुए, उसे आत्मिक ऊंचाई से जोड़ा.
उन्होंने कहा,
“असली आजादी वही है जो आत्मा को कली से फूल की तरह खिला दे. भारतीय चेतना के मूल में निहित यह स्वतंत्रता हमें न केवल इतिहास से जोड़ती है, बल्कि भविष्य की दिशा भी निर्धारित करती है.”
उनके शब्दों ने मंच-दीर्घा में उपस्थित सैकड़ों श्रोताओं को तालियों की गड़गड़ाहट से नवाजा. राय ने गाजीपुर के स्वतंत्रता संग्राम एवं सैन्य पराक्रम में योगदान को रेखांकित करते हुए कहा कि यह धरती न केवल क्रांतिकारियों की जन्मभूमि है, बल्कि सांस्कृतिक जागरण का केंद्र भी रही है.
गाजीपुर लिटरेचर फेस्टिवल की को-फाउंडर प्रिया प्रियमवदा और विवेक सत्यमित्रम के साथ उपेंद्र राय का संवाद भी चर्चा का केंद्र रहा. इस संवाद में गाजीपुर और उसके ऐतिहासिक-सांस्कृतिक पहलुओं पर गहन चर्चा हुई. प्रियमवदा ने फेस्टिवल के माध्यम से स्थानीय साहित्य को वैश्विक पटल पर लाने की चुनौतियों पर प्रकाश डाला, जबकि सत्यमित्रम ने युवा लेखकों को प्रोत्साहित करने वाली योजनाओं का जिक्र किया.
यह तीन दिवसीय आयोजन साहित्यिक जगत की प्रमुख हस्तियों से सराबोर रहा. उद्घाटन समारोह में वरिष्ठ साहित्यकार अंजान श्रीवास्तव, लेखिका नीरजा माधव, लेखक मृत्युंजय सिंह, कवि व्योमेश शुक्ल, भोजपुरी साहित्यकार मनोज भावुक, सी-वोटर के फाउंडर यशवंत देशमुख, बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अजीत चतुर्वेदी तथा पद्मश्री संगीताचार्य डॉ. राजेश्वर आचार्य उपस्थित थे. दूसरे दिन जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शिरकत की, जबकि भाजपा राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रेम शुक्ला, दक्षिण अफ्रीका के उच्चायुक्त अनिल सुखलाल, गुयाना के उच्चायुक्त केशव तिवारी, पोलैंड की विदुषी कैमिला जुनिक तथा डच राजनयिक रमन भगवानदीन जैसे राजनयिकों ने साहित्यिक संवादों में भाग लिया.
फेस्टिवल के अंतिम दिन का लाइव प्रसारण यूट्यूब पर भी उपलब्ध रहा, जहां हजारों दर्शकों ने इसे देखा. आयोजकों के अनुसार, जीएलएफ ने न केवल साहित्य प्रेमियों को एकजुट किया, बल्कि गाजीपुर को सांस्कृतिक मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.
गाजीपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2025 के समापन पर CMD उपेंद्र राय ने कहा, “यह फेस्टिवल गाजीपुर की आत्मा का उत्सव था, जो आने वाले वर्षों में और भी भव्य रूप धारण करेगा.” यह आयोजन साबित करता है कि साहित्य केवल किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाली शक्ति है. गाजीपुर लिटरेचर फेस्टिवल 2025 ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया कि छोटे शहर भी वैश्विक संवादों का केंद्र बन सकते हैं.
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