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Premanand Maharaj Ashram Controversy: भारत में आश्रम और डेरे सिर्फ धार्मिक स्थल नहीं होते. लाखों लोगों के लिए ये आस्था और आध्यात्मिकता के केंद्र होते हैं. लेकिन जब इन्हीं जगहों से किसी मौत, लापता होने या गंभीर अपराध की न्यूज सामने आती है तो पूरे तंत्र पर सवाल उठने लगते हैं.
कुछ दिनों पहले वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम से जुड़े दो मामलों ने ऐसी ही बहस को फिर जिंदा कर दिया है. मध्य प्रदेश के रहने वाले 25 साल के शिष्य दीपक लोधी की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई. उन्होंने चौथी मंजिल से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली. इसका सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है. वहीं दूसरी तरफ हाथरस के 18 साल अनुज चौधरी के कई महीनों तक परिवार से संपर्क में नहीं होने का मामला भी सामने आया.
इन घटनाओं ने ‘आश्रमों में क्या चल रहा है?’ इस बात को लेकर नई बहस छेड़ दी है. यह कोई पहला मामला नहीं है जब बाबाओं के आश्रमों पर सवाल खड़े किये गए हों. इससे पहले राम रहीम और आसाराम जैसे धार्मिक बाबाओं पर भी गंभीर आरोप लग चुके हैं. दोनों को अदालत ने सजा तक सुनाई है.
जब डेरा सच्चा सौदा पर लगा सबसे बड़ा दाग
भारत में आश्रमों और डेरों पर सवालों की बात हो और डेरा सच्चा सौदा का नाम न आए, ऐसा मुश्किल है. डेरा सच्चा सौदा के संचालक गुरमीत राम रहीम कभी करोड़ों अनुयायियों वाले धार्मिक गुरु के तौर पर जाने जाते थे. लेकिन साल 2017 में साध्वी यौन शोषण मामले में उन्हें दोषी ठहराया गया और 20 साल की सजा सुनाई गई. इसके बाद डेरे से जुड़े कई और मामले देशभर में सुर्खियां बने.
गुरमीत राम रहीम पर पत्रकार रामचंद्र छत्रपति और रणजीत सिंह की हत्या के गंभीर आरोप लगे. इसके अलावा आश्रम में लोगों को जबरन नपुंसक बनाने का भी मामला सामने आया था. कोर्ट ने राम रहीम पर लगे आरोपों को लेकर सरकार से प्रशासन तक पर कड़ी टिप्पणी की. कुछ मामलों में अदालतों ने राम रहीम को सजा सुनाई, कुछ में बाद में राहत मिली और कुछ केस अभी भी अदालतों में चल रहे हैं.
आसाराम का साम्राज्य और अंत
एक समय देशभर में सैकड़ों आश्रम चलाने वाले आसाराम बापू का नाम भी ऐसे मामलों में सबसे ज्यादा चर्चा में रहा. उनपर नाबालिग से दुष्कर्म का आरोप लगा. जिसे अदालत ने सही माना और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई. बाद में कुछ आरोपों पर अदालत से राहत जरूर मिली, लेकिन सजा बरकरार रही.
आस्था बनाम जवाबदेही
वृंदावन के मामले में पुलिस अभी जांच कर रही है. इसलिए किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी. लेकिन अगर हम इतिहास झांक कर देखें तो यह हमें पता चलता है कि भारत के आश्रम या डेरे में पारदर्शिता की भारी कमी है. जिसकी वजह से उनपर आरोप लगते रहे हैं. अब सवाल सिर्फ ये है कि आखिर कब इन धार्मिक संस्थानों की जवाबदेही तय की जाएगी.
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-भारत एक्सप्रेस
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