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वे कौन सी शख्सियते हैं, जो रामायण और महाभारत दोनों काल में थीं?

महाभारत और रामायण हमारे सबसे बड़े महाकाव्य हैं. रामायण सृष्टि के दूसरे युग त्रेता, तो वहीं महाभारत तीसरे युग द्वापर की कहानी है, जिनके बीच (लाखों वर्ष) समय का बहुत बड़ा अंतर रहा. ऐसी कई शख्सियत थीं, जो रामायण और महाभारत-काल दोनों का हिस्सा रहीं.

Ramayana To Mahabharata: रामायण और महाभारत दोनों भारतीय इतिहास के दो महान महाकाव्य हैं और इन दोनों की रचना पूरी तरह से अलग-अलग समय-काल में हुई थी. रामायण सृष्टि के दूसरे युग त्रेता, तो वहीं महाभारत तीसरे युग द्वापर की कहानी है, जिनके बीच (लाखों वर्ष) समय का बहुत बड़ा अंतर रहा. फिर भी लोगों को यह जानकर आश्चर्य होगा कि ऐसी कई शख्सियत थीं, जो रामायण और महाभारत-काल दोनों का हिस्सा रहीं. यहां हम आपको ऐसे ही कुछ नाम बता रहे हैं-

  • हनुमानजी का जन्‍म त्रेतायुग में श्रीराम से पहले हुआ था, लेकिन उनके बाद भी जीवित हैं
  • हनुमानजी की तरह ही कलयुग में परशुरामजी की उप‍स्थिति भी बताई जाती है.
  • रावण के भाई विभीषण, रामायण और महाभारत दोनों काल में उपस्थित थे.

1. हनुमान:

हनुमानजी तो अजर-अमर बतलाए गए हैं. कहने को वह वानर हैं, किंतु उनके शौर्य-पराक्रम, बल-बुद्धि की थाह नहीं है. रामायण में उन्‍होंने भगवान के श्रीरामावतार में साथ दिया, उसके बाद महाभारत-काल में भी उन्‍होंने भगवान के श्रीकष्‍णावतार के दर्शन किए. ग्रंथों में ऐसा उल्‍लेख है कि, हनुमान कलयुग में यानी अभी भी पृथ्वी पर मौजूद हैं.

2. परशुराम:

भगवान विष्‍णु के अंशावतार परशुराम की उपस्थिति ने जहां रामायण की शोभा बढ़ाई, वहीं उनके शाप ने महाभारत का ट्रैक भी बदल दिया. उनका जन्‍म त्रेता युग में हुआ. द्वापर में वह महाभारत-काल के तीन सबसे महान योद्धाओं के भी गुरु बने, जो थे- भीष्म, द्रोणाचार्य और कर्ण. हनुमानजी की तरह परशुरामजी की उप‍स्थिति भी कलयुग में बताई जाती है.

3. मयासुर: मंदोदरी के पिता और रावण के ससुर थे मायासुर. इन्‍होंने महाभारत-काल में पांडवों के लिए इंद्रप्रस्‍थ का निर्माण किया.
4. अगस्त्य: ब्रम्हास्त्र के मूल स्वामी. रामायण के अलावा महाभारत में इनका उल्लेख है.
5. महर्षि भारद्वाज: द्रोण के पिता थे, जो रामायण की रचना करने वाले महर्षि वाल्मीकि के शिष्य थे.
6. कुबेर: रावण के बड़े व सौतेले भाई.
7. विभीषण: रावण के भाई, अभी तक जीवित.
8. विश्वामित्र: श्रीराम के गुरु. ये शकुंतला के पिता थे, जो भरत की माता थी, जिनके नाम पर देश का नाम महाभारत पड़ा.
9. नारद मुनि: देवर्षि, ब्रह्माजी के पुत्र
10. जाम्बवंत: ये भी कई युगों तक जीवित रहे.
11. महर्षि दुर्वासा: शिव के अंशावतार
12. ऋषि पाराशर
13. महर्षि भारद्वाज
14. पुलस्त्य मुनि: रावण के दादा

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-भारत एक्सप्रेस



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