Prithvinath Temple
Sawan 2025: सावन के महीने में कावड़ियों और शिवभक्तों की शिव मंदिरों में भारी भीड़ है. सावन की शिवरात्रि को लेकर कांवड़ियों और डाक कावंड़ियों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है. यूपी के गोंडा जनपद स्थित पृथ्वीनाथ मंदिर (Prathvinath temple) में शिवभक्तों की भीड़ के कारण मंदिर में पैर रखने तक की जगह नहीं मिल पा रही है.
Prathvinath temple के शिवलिंग की थी भीम ने स्थापना
पृथ्वीनाथ मंदिर गोंडा मुख्यालय से 33 किलोमीटर की दूरी पर खरगापुर में स्थित है. कहा जाता है कि इस मंदिर के शिवलिंग की स्थापना महाभारत काल में भीम ने की थी. महाभारत काल में पांडव अज्ञातवास में थे उसी समय खरगापुर में रुकने के दौरान भीम ने 61फीट विशाल शिवलिंग की स्थापना की थी.
कैसे हुई 61फीट विशाल शिवलिंग की स्थापना
मान्यता है कि पांडव अज्ञातवास के दौरान खरगापुर में एक ब्राह्मण परिवार में रुके थे. खरगापुर क्षेत्र में उन दिनों बकासुर राक्षस का का चारों ओर भय व्याप्त था. वह रोज एक व्यक्ति को भोजन के रूप में खा जाता था.
एक दिन पांडवो को शरण देने वाले परिवार के सदस्य की बारी आ गई. भीम ने इस परिवार से राक्षस के पास जाने से रोक दिया. इस बात से नाराज बकासुर ने भीम को युद्व की चुनौती दे डाली. दोनों के बीच भीषण युद्ध हुआ जिसमें बकासुर राक्षस मारा गया. बकासुर भगवान शंकर का भी भक्त था इसीलिए भीम ने बकासुर के मारे जाने पर प्रायश्चित करते हुए 61 फीट विशाल शिवलिंग की स्थापना की .
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मंदिर का नाम Prathvinath temple कैसे पड़ा
वक्त के साथ साथ यह शिवलिंग जर्जर हो गया और पृथ्वी में हुए तमाम बदलाव के कारण यह जमीन में समा गया. बताया जाता है. खरगापुर निवासी पृथ्वी सिंह अपने घर का निर्माण कारा रहे थे. इसी दौरान उन्हें सपना आया कि जहां घर का निर्माण हो रहा है, उस जमीन के नीचे विशाल शिवलिंग है. पृथ्वी सिंह ने खुदाई तेज करवा दी, खुदाई में एक विशालकाय शिवलिंग प्रकट हुआ. क्षेत्रीय नागरिकों ने पृथ्वी सिंह के साथ मिलकर शिवलिंग को स्थापित किया और यहां एक विशाल मंदिर बनाया. पृथ्वी सिंह के नाम से ही इस मंदिर का नाम पृथ्वीनाथ (Prathvinath temple) पड़ा.
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के मुताबिक 5000 वर्ष हजार पुराना है शिवलिंग
तीन दशक पहले गोंडा के सांसद आनंद सिंह के प्रयासों से भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण ने पृथ्वीनाथ मंदिर (Prathvinath temple) के शिवलिंग की पौराणिकता की जांच की. ASI की टीम ने जांच कर बताया कि यह एशिया का सबसे बड़ा शिवलिंग है और 5000 वर्ष पुराना है. सांसद आनंद सिंह ने मंदिर का जीर्णोद्वार भी कराया. वह अक्सर मंदिर में शिवलिंग की पूजा अर्चना करने आते थे. शिवलिंग सिर्फ साढ़े पांच फीट दिखाई पड़ता है जबकि धरती के नीचे भी शिवलिंग का एक बड़ा हिस्सा है.
Prathvinath temple में पूजा अर्चना करने से होती हैं मनोकामना पूरी
पृथ्वीनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी जगदम्बा प्रसाद तिवारी ने बताया कि पौराणिक पृथ्वीनाथ मंदिर का सावन माह में विशेष महत्व है. उनके अनुसार श्रद्धालुओं के जलाभिषेक, पूजन अर्चन, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप, श्रृंगार पूजा आदि करने से मनोकामना पूरी होती है.
सावन महीने की शिवरात्रि पर्व के लिए सुरक्षा के हैं विशेष इंतजाम
सावन महीना और उसके बाद सावन की शिवरात्रि पर्व पर पृथ्वीनाथ मंदिर सभी ओर शिवभक्त नजर आ रहे हैं. पुलिस ने भी भीड़ देखते हुए सुरक्षा कड़ी कर दी हैं. मंदिर आने वाले रुट पर डाइवर्जन स्कीम लागू की है. वाहनों का प्रवेश मंदिर के बाहर 2 किलोमीटर पहले ही प्रतिबंधित कर दिया गया है. शिवभक्त पैदल ही मंदिर तक पहुंच रहे हैं. पृथ्वीनाथ मंदिर में शिवभक्तों लगातार बढ़ रहीभीड़ पुलिस के लिए एक बड़ी चुनौती है.
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–भारत एक्सप्रेस
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