Bharat Express DD Free Dish

बंगाल की अनोखी दिवाली: जहां चिता न आने तक नहीं चढ़ता भोग; चीनी काली मंदिर में भी है खास परंपरा

Chinese Kali Temple West Bengal: कोलकाता के केवड़ातला महाश्मशान में जलती चिताओं के बीच 154 साल से हो रही है अनोखी काली पूजा. यहां मां की मूर्ति में जीभ अंदर रहती है.

keoratala-maha shamshan-ghat-kali
Vijay Ram Edited by Vijay Ram

Unique Diwali Tradition: पश्चिम बंगाल में नवरात्र के साथ-साथ काली पूजा का भी उतना ही महत्व है, जो इस वर्ष दीपावली के दिन यानी 20 अक्टूबर को मनाई जाएगी. इस अनोखी पूजा की तैयारियां महानगर के सबसे बड़े श्मशान, केवड़ातला महाश्मशान, में लगभग पूरी हो चुकी हैं. यह स्थान मशहूर कालीघाट मंदिर के पास स्थित है, जहां चौबीस घंटे चिताएं जलती रहती हैं.

महाश्मशान की रहस्यमय परंपरा

काली पूजा के आयोजक उत्तम दत्त बताते हैं कि उनकी पूजा की सबसे खास बात यह है कि जब तक श्मशान में कोई शव नहीं आता, तब तक देवी को भोग नहीं चढ़ाया जाता. इसके अलावा, पूजा के समय पंडाल में जलने के लिए आने वाली एक चिता को भी रखा जाता है. इन्हीं रहस्यमय परंपराओं के चलते श्मशान का माहौल और भी खास बन जाता है.

154 साल पुरानी परंपरा और देवी का विशेष स्वरूप

यह परंपरा 150 साल से भी अधिक पुरानी है, जिसकी शुरुआत 1870 में एक कापालिक ने दो स्थानीय ब्राह्मणों की मदद से की थी. अमूमन काली माता की मूर्तियों में 8 से 12 हाथ और बाहर निकली जीभ होती है, लेकिन केवड़ातला की काली पूजा की मूर्ति में सिर्फ दो हाथ होते हैं और देवी की जीभ भी मुंह के अंदर रहती है. दत्त के अनुसार, चिताओं के बीच होने वाली यह सबसे बड़ी पूजा है.

कोलकाता का काली मंदिर: हिंदू-चीनी संस्कृति का तालमेल

कोलकाता के मशहूर टेंगरा इलाके में एक और अनोखा ‘चीनी काली मंदिर’ है, जो हिंदू और चीनी संस्कृति के बेहतरीन तालमेल को दर्शाता है. मंदिर के पुजारी अर्णब मुखर्जी ने इस मंदिर के इतिहास के बारे में बताया कि करीब छह दशक पहले एक गंभीर रूप से बीमार चीनी बालक तमाम इलाज के बाद भी ठीक नहीं हुआ. उसके परिवार वालों ने पेड़ के नीचे रखे पत्थरों (नारायण शिला) की पूजा कर बच्चे के स्वस्थ होने का आशीर्वाद मांगा.

बच्चा चमत्कारिक रूप से स्वस्थ हो गया, जिसके बाद चीनियों में काली देवी के प्रति श्रद्धा रातों-रात बढ़ी और चंदा जुटा कर इस मंदिर का निर्माण कराया गया. इस मंदिर में नारायण शिला होने के कारण यहां चढ़ने वाला भोग पूरी तरह शाकाहारी होता है, जबकि बंगाल की काली पूजा में मांस का भोग चढ़ाने की भी परंपरा है.

यह भी पढ़िए: महालक्ष्मी के इस मंदिर में प्रसाद के रूप में भक्तों को मिलते हैं पैसे, धन के खजाने भरती हैं मां



इस तरह की अन्य खबरें पढ़ने के लिए भारत एक्सप्रेस न्यूज़ ऐप डाउनलोड करें.

Also Read