नेता नहीं, मसीहा थे गांधी! जानिए 100 साल पहले पूर्वी यूपी के किसानों ने गांधी को कैसे गढ़ा था?
1920 के दशक में पूर्वी उत्तर प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में महात्मा गांधी की छवि सिर्फ एक राजनीतिक नेता तक सीमित नहीं थी. गोरखपुर के किसानों के बीच वे ‘महात्मा’ के रूप में लोकप्रिय हो चुके थे, जिनसे जुड़ी कई धार्मिक मान्यताएं, अफवाहें और चमत्कारों की कहानियां प्रचलित थीं.
एक हिंसक घटना जिसने गांधी के अहिंसा आंदोलन रोकने पर मजबूर कर दिया
चौरी चौरा कांड की 104वीं वर्षगांठ पर यह घटना फिर याद दिलाती है कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अहिंसा और जनाक्रोश के बीच संतुलन कितना जटिल था. 1922 की इस घटना ने ना सिर्फ असहयोग आंदोलन को रोका, बल्कि राष्ट्रीय आंदोलन की दिशा और बहस को हमेशा के लिए बदल दिया.





