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Decolonization

भारत में आज 'आत्मनिर्भरता' और 'लोकल के लिए वोकल' जैसे नारे खूब सुनाई देते हैं. लेकिन क्या सिर्फ आर्थिक और राजनीतिक आज़ादी ही काफी है? क्या हमारी सोच, हमारा ज्ञान और दुनिया को देखने का तरीका भी पूरी तरह आज़ाद हो पाया है? इसी बड़े और असहज सवाल को सामने लाती है अभय कुमार दुबे की नई किताब ‘उपनिवेशवाद का अलौकिक साम्राज्य’.