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आईएमएफ (IMF) के अनुमानों पर आधारित ईवाई रिपोर्ट के अनुसार, भारत की इकोनॉमी 2030 तक 20.7 ट्रिलियन डॉलर (पीपीपी के संदर्भ में) तक पहुंच सकती है.

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 की चौथी तिमाही में भारत की जीडीपी में 7.4% की मजबूत वृद्धि हुई.

रिपोर्ट में कहा गया है, "वित्त वर्ष 25 में वास्तविक जीडीपी में 6.5% की वृद्धि हुई, जो दूसरे अग्रिम अनुमानों के अनुरूप है. यह वृद्धि भू-राजनीतिक तनाव और व्यापार अनिश्चितताओं से चिह्नित चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल के बीच हुई."

मॉर्गन स्टैनली ने FY26 के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 6.2% और FY27 के लिए 6.5% कर दिया है.

बार्कलेज ने Q4FY25 में भारत की GDP ग्रोथ 7.2% रहने का अनुमान जताया है, जिसमें टैक्स वसूली और कृषि क्षेत्र में सुधार मुख्य कारण हैं.

आरबीआई बुलेटिन के अनुसार, "इन चुनौतियों के बीच, भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती प्रदर्शित की है. अप्रैल में औद्योगिक और सेवा क्षेत्रों के हाई-फ्रिक्वेंसी इंडीकेटर्स ने अपनी गति बनाए रखी."

यूएनसीटीएडी की रिपोर्ट में कहा गया कि भारत 2025 में दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था बना रहेगा और इस दौरान देश की जीडीपी विकास दर 6.5 प्रतिशत रह सकती है.

FICCI) ने गुरुवार (16 जनवरी) को अनुमान लगाया कि भारतीय अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 26 में 6.5-6.9 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्ज करेगी, जो इनफ्लेशन के दबाव में कमी, पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) पर निरंतर जोर और उपभोक्ता खर्च में तेजी के कारण होगी.

वर्ल्ड बैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में वृद्धि दर में सुस्ती की वजह ऊंची मुद्रास्फीति और कर्ज की लागत बढ़ने के चलते निजी खपत का प्रभावित होना है. वर्ल्‍ड बैंक ने भारतीय अर्थव्यवस्था के इस साल 6.3 प्रतिशत की दर से बढ़ने का अनुमान जताया है.