इंकलाब जिंदाबाद आज भी क्यों गूंजता है? सड़कों पर क्या हो रहा है और लोग आखिर कहना क्या चाहते हैं?
इंकलाब जिंदाबाद का असली मतलब क्या है? भगत सिंह के विचारों से निकला यह नारा आज भी छात्रों, किसानों और लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई में क्यों गूंजता है, जानिए इस विशेष लेख में.
“मेरा रंग दे बंसती चोला…”, स्वतंत्रता संग्राम में इंकलाब की लौ जलाने वाले भगत सिंह की आज है जयंती
Bhagat Singh Jayanti: 28 सितंबर, 1907 को पंजाब के बंगा गांव में जन्मे भगत सिंह न केवल एक क्रांतिकारी थे, बल्कि एक विचारक, लेखक और समाज सुधारक भी थे, जिन्होंने अपनी छोटी सी उम्र में देश की आजादी के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया.







