Bharat Express DD Free Dish
Pension Mission Shakti Digital
Pension Mission Shakti Digital

king Ashoka

सारनाथ के गौरवशाली इतिहास, सम्राट अशोक के सिंह चतुर्मुख स्तंभ और भारत के राष्ट्र चिह्न की जब भी बात होती है, तो ब्रिटिश पुरातत्वविदों के नाम प्रमुखता से सामने आते रहे हैं. लेकिन 200 से अधिक वर्षों तक गुमनाम रहे उस भारतीय - बाबू जगत सिंह - का नाम आखिरकार आधिकारिक इतिहास का हिस्सा बन गया है, जिन्होंने 18वीं सदी में पहली बार सारनाथ के पुरातात्विक महत्व को उजागर किया था. जानिए कैसे उनके वंशज प्रदीप नारायण सिंह के वर्षों के शोध और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के ऐतिहासिक फैसले ने इतिहास के इस सबसे बड़े अन्याय को सुधारा और भारत के नाम एक गौरवशाली पन्ना जोड़ा.