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Rigorous Imprisonment

सीबीआई ने 30 सितंबर 2005 को इस मामले में छह आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी, जिनमें तीन — शिव शंकर गुप्ता (तत्कालीन शाखा प्रबंधक, ओआईसीएल, सहरसा), नरेंद्र कुमार मिश्रा और मोहन मिश्रा — मुकदमे की प्रक्रिया के दौरान ही दिवंगत हो गए.

केंद्रीय जांच ब्यूरों अदालत ने धोखाधड़ी को लेकर बीमा दावे के एक मामले में सुनवाई की. इस दौरान अदालत ने मामले में 2 दोषियों को 5 साल की कैद की सजा सुनाई. इसके साथ ही CBI अदालत ने 17.2 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया है.