सिनेमा का ‘माणिक’ और फ्रांस का गौरव: 1989 का वो दिन जब पूरी दुनिया ने माना सत्यजीत रे का लोहा
साल 1989 में भारतीय सिनेमा को वैश्विक गौरव मिला जब फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांस्वा मित्तेरां ने खुद कोलकाता आकर सत्यजीत रे को फ्रांस के सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'लेजियोन ऑफ ऑनर' से सम्मानित किया. सादगी और मानवीय संवेदनाओं के चितेरे रे ने 'अपू त्रयी' जैसी फिल्मों से विश्व सिनेमा की दिशा बदल दी थी.
सत्यजीत रे की पैतृक संपत्ति को लेकर भारत-बांग्लादेश सहयोग की पहल, ऐतिहासिक इमारत के संरक्षण पर जोर
भारत सरकार ने प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक और साहित्यकार सत्यजीत रे की पैतृक संपत्ति को संरक्षित करने की दिशा में पहल की है. यह ऐतिहासिक इमारत बांग्लादेश के मयमनसिंह में स्थित है, जो उनके दादा उपेंद्र किशोर रे चौधरी की थी.
सत्यजीत रे की फिल्म ‘पाथेर पांचाली’ में दुर्गा की भूमिका निभाने वाली अभिनेत्री उमा दासगुप्ता का निधन
उमा दासगुप्ता ने पाथेर पांचाली के बाद कभी मुख्यधारा की फिल्मों में कदम नहीं रखा. सत्यजीत रे द्वारा निर्देशित यह फिल्म बिभूतिभूषण बंद्योपाध्याय के 1929 के इसी नाम के बंगाली उपन्यास पर आधारित थी.





