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Social Justice

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में रहने वाले 83 वर्षीय जागेश्वर प्रसाद अवधिया की जिंदगी एक झूठे आरोप ने बदल दी. साल 1986 में लगे 100 रुपये की रिश्वत लेने के आरोप ने उनकी नौकरी,परिवार और सम्मान सब छीन लिया. अब,39 साल बाद हाईकोर्ट ने उन्हें पूरी तरह बरी कर दिया है. लेकिन न्याय मिलने में हुई देरी ने उनके जीवन को अपूरणीय क्षति पहुंचाई है.अवधिया इस केस से बरी होने के बाद अब सरकार से अपनी बकाया पेंशन और आर्थिक सहायता की मांग कर रहे हैं, ताकि अपने जीवन के बचे हुए दिन सुकून से गुजार सकें.

मध्य प्रदेश में ओबीसी को 27% आरक्षण का रास्ता साफ हो गया है. सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए सभी याचिकाओं का निपटारा कर दिया है.