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South Asia Politics

भारत और पाकिस्तान के बीच जब भी तनाव बढ़ता है, सबसे पहले बातचीत के दरवाजे बंद हो जाते हैं। लेकिन ऐसे मुश्किल समय में एक शख्स पिछले पैंतीस सालों से दोनों देशों के बीच शांति और संवाद की कोशिश में जुटा हुआ है। इस शख्स का नाम है ओपी शाह।

बांग्लादेश में 12 फरवरी को प्रस्तावित आम चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज़ है और भारत की चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं. वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के बाद अमेरिका और जमात-ए-इस्लामी के बढ़ते संपर्कों पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. शेख हसीना सरकार के पतन, अवामी लीग पर बैन और यूनुस सरकार से तनावपूर्ण रिश्तों ने हालात और जटिल बना दिए हैं. जमात का भारत-विरोधी और पाकिस्तान-समर्थक रुख दिल्ली के लिए खतरे की घंटी माना जा रहा है. बड़ा सवाल यही है, क्या बांग्लादेश में हो रहा राजनीतिक बदलाव भारत के खिलाफ किसी बड़ी रणनीति का हिस्सा है?

पाकिस्तान जब से आजाद हुआ उसके बाद से उस देश में कोई भी चुनी हुई सरकार अपने मन से काम नहीं कर पाई. कोई न कोई बहाना बनाकर चुनी हुई सरकार पर सेना हाबी हो जाती है और देश का प्रधानमंत्री सीधे अपने कुर्सी से कहीं और नहीं बल्कि जेल पहुंच जाता है. कुछ ऐसा वाकया पाकिस्तान में एक बार फिर से देखने को मिला है.

सत्ता, संघर्ष और सियासत के हर मोड़ को करीब से देखने वाली एक सशक्त नेता अब खामोश हो गई हैं....दो बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री रहीं, बीएनपी की अध्यक्ष और मजबूत राजनीतिक पहचान बनीं बेगम खालिदा जिया का आज निधन हो गया....एक ऐसी महिला नेता, जिन्होंने सत्ता के शिखर से लेकर राजनीतिक संघर्षों तक का लंबा सफर तय किया, आज दुनिया को अलविदा कह गईं....आपको बतादें की बांग्लादेश ने अपनी एक बड़ी राजनीतिक हस्ती को खो दिया है.,,,बीएनपी की अध्यक्ष और देश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का मंगलवार सुबह...

बांग्लादेश की राजनीति और छात्र आंदोलनों को लेकर इस समय एक बड़ी खबर सामने आ रही है. साल 2024 के चर्चित छात्र विद्रोह में अहम भूमिका निभाने वाले छात्र नेता शरीफ उस्मान हादी का बीते गुरुवार यानी 18 दिसंबर 2025 को निधन हो गया. सिंगापुर के विदेश मंत्रालय की ओर मिली जानकारी के अनुसार, उसकी मौत किसी हमले में लगी गंभीर चोटों के कारण हुई, जिसमें उसे गोली मारी गई थी. इस खबर के आने के बाद से ही बांग्लादेश में शोक और तनाव का माहौल बन गया है.

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के रिश्तों में एक बार फिर तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है। सीमा सुरक्षा, आतंकवाद, शरणार्थियों और कूटनीतिक मतभेदों को लेकर दोनों देशों के बीच हालात लगातार जटिल होते जा रहे हैं। इसी बीच अफगानिस्तान की ओर से एक ऐसा कदम उठाए जाने की अटकलें तेज़ हैं, जिससे पाकिस्तान की रणनीतिक और सुरक्षा चुनौतियाँ और बढ़ सकती हैं। इस वीडियो में हम समझेंगे कि दोनों देशों के बीच तनाव की जड़ क्या है, अफगानिस्तान किस तरह का कदम उठा सकता है, और इसका असर क्षेत्रीय राजनीति व सुरक्षा पर कैसे पड़ सकता है। पूरी जानकारी और विश्लेषण के लिए वीडियो अंत तक देखें।

भारत दौरे के 8 दिन बाद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तुर्केमिनिस्तान विजिट पर हैं. 2 दिन के इस विजिट में पुतिन तुर्केमिनिस्तान के साथ-साथ तुर्की से भी संपर्क साधेंगे. तुर्की की एक प्रतिष्ठित मीडिया के मुताबिक राष्ट्रपति एर्दोआन से अश्गाबात नामक स्थान पर वो दोनों लोग मुलाकात करेंगे. आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि कूटनीतिक दुनिया में तुर्की को भारत का दुश्मन देश माना जाता है.

पाकिस्तान के पहले चीफ ऑफ डिफेंस फोर्सेज नियुक्त किए जाने के बाद, फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने पहली स्पीच दी. अपने इस पहले ही भाषण में वो भारत को गीदड़भभकी देते दिखाई दे रहे हैं. असीम मुनीर की ताकत अब बढ़ गई है. उनके पास न सिर्फ तीनों सैन्य शाखाओं अधिकार की ताकत है. बल्कि उनके हाथ परमाणु ताकत का बटन भी लग गया है. सीडीएफ बनने के बाद अपने पहले भाषण में, असीम मुनीर ने कहा किसी भी भविष्य के आक्रमण के हालात में पाकिस्तान की प्रतिक्रिया पहले से भी ज्यादा “तेज़, कड़ी और तीव्र” होगी.