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ट्रंप की ‘वॉर्निंग’ से थर्राया सर्राफा बाजार! सोना 2200 तो चांदी 10,000 रुपये गिरी, जानें क्या यही है गोल्ड में निवेश का सही समय?

Donald Trump के ईरान पर सख्त बयान के बाद MCX में सोना ₹2,000 और चांदी ₹10,000 तक गिर गई. डॉलर मजबूत होने और बॉन्ड यील्ड बढ़ने से निवेशकों ने भारी मुनाफावसूली शुरू कर दी…

Gold-Silver Price Today: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान युद्ध पर दिए गए ताजा संबोधन ने न केवल वैश्विक राजनीति बल्कि कमोडिटी मार्केट में भी सुनामी ला दी है. ट्रंप के कड़े रुख और सैन्य एक्शन तेज करने के बयान के बाद गुरुवार, 2 अप्रैल 2026 को भारतीय बाजार (MCX) खुलते ही सोने और चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई.

वहीं सुरक्षित निवेश माना जाने वाला सोना एक झटके में ₹2,000 से ज्यादा टूट गया, वहीं चांदी की चमक भी ₹10,000 प्रति किलो तक फीकी (Silver Price Crash) पड़ गई है. निवेशकों के बीच मची इस खलबली ने सर्राफा बाजार में हड़कंप मचा दिया है.

चांदी-सोना में कितनी गिरावट?(Gold-Silver Price Today)

गुरुवार सुबह 9 बजे जैसे ही मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर कारोबार शुरू हुआ, कीमती धातुओं में भारी बिकवाली देखी गई. सोना 2,228 रुपये की बड़ी गिरावट के साथ 1,51,480 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया. लेकिन सबसे बड़ा झटका चांदी के निवेशकों को लगा, जहां दाम 10,225 रुपये प्रति किलोग्राम तक लुढ़क कर 2,33,276 रुपये पर पहुंच गए. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी गोल्ड 1.98% और सिल्वर 5% तक गिर चुके हैं, जिससे यह साफ है कि वैश्विक स्तर पर कीमती धातुओं पर दबाव चरम पर है.

ट्रंप का संबोधन बना वजह?

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस भारी गिरावट (Gold-Silver Price Crash) के पीछे ‘ट्रंप फैक्टर’ सबसे अहम है. जैसे ही ट्रंप ने ईरान के खिलाफ ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ की सफलता और अगले 2-3 हफ्तों में और तेज हमलों का ऐलान किया, कमोडिटी मार्केट में एक बड़ी ‘लाल कैंडल’ (गिरावट का संकेत) बनी.

वहीं ट्रंप के बयान से डॉलर इंडेक्स और बॉन्ड यील्ड में अचानक तेजी आई, जिससे बिना ब्याज वाले एसेट जैसे सोने-चांदी में निवेश कम आकर्षक हो गया. निवेशकों ने युद्ध के बढ़ते जोखिम और अनिश्चितता के बीच भारी मुनाफावसूली (Profit Booking) शुरू कर दी है.

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गिरावट पर एक्स्पर्ट्स का क्या है कहना?

सोने-चांदी की कीमतों में गिरावट की एक अन्य बड़ी वजह अमेरिकी फेडरल रिजर्व (US Fed) का रुख भी है. महंगाई के बढ़ते खतरों को देखते हुए फिलहाल ब्याज दरों में कटौती की उम्मीदें धूमिल हो गई हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि 2026 के अंत से पहले रेट कट की संभावना न के बराबर है. मजबूत डॉलर और बढ़ती बॉन्ड यील्ड ने कीमती धातुओं के लिए ‘दोहरी मार’ का काम किया है. प्लैटिनम और पैलेडियम जैसी अन्य महंगी धातुओं में भी इसी वजह से बिकवाली का दौर जारी है.

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-भारत एक्सप्रेस



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