Sona Chandi Aaj Ka Bhav: वैश्विक बाजारों से मिल रहे कमजोर संकेतों और कच्चे तेल के दामों में उछाल के चलते भारतीय सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट का दौर जारी है. पिछले तीन दिनों में 24 कैरेट सोने का भाव 3,610 रुपये प्रति 10 ग्राम तक टूट चुका है, जबकि चांदी के भाव में 10,100 रुपये प्रति किलो की भारी नरमी दर्ज की गई है. खरीदारी या निवेश की योजना बना रहे लोगों के लिए यह एक महत्वपूर्ण मौका हो सकता है.
कच्चे तेल में तेजी और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता के कारण पिछले तीन दिनों में 24 कैरेट सोना 3,610 रुपये और चांदी 10,100 रुपये सस्ती हुई है. वर्तमान में दिल्ली में 24 कैरेट सोने का भाव 1,42,620 रुपये प्रति 10 ग्राम और चांदी का भाव 2,20,000 रुपये प्रति किलो के स्तर पर आ गया है.
तीन दिन में कितना सस्ता हुआ सोना?
सोने की कीमतों में लगातार तीसरे दिन गिरावट दर्ज की गई है. पिछले तीन दिनों में 24 कैरेट सोने का 10 ग्राम भाव 3,610 रुपये नीचे आया है, जबकि 22 कैरेट सोना 3,301 रुपये तक सस्ता हुआ है. शनिवार को भी दोनों कैटेगरी के भाव में 10 प्रति 10 ग्राम रुपये की मामूली गिरावट दर्ज की गई. 24 कैरेट सोना सबसे अधिक शुद्धता वाला होता है, जबकि 22 कैरेट सोने का इस्तेमाल आमतौर पर गहने बनाने के लिए किया जाता है.
दिल्ली से मुंबई तक प्रमुख शहरों में सोने का भाव (प्रति 10 ग्राम)
देश के प्रमुख शहरों में सोने की कीमतों में मामूली अंतर देखने को मिल रहा है:

चांदी की कीमतों में भी भारी गिरावट
चांदी की कीमतों में भी लगातार तीन दिनों से कमजोरी बनी हुई है. इस दौरान एक किलो चांदी 10,100 रुपये सस्ती हुई है. इससे पहले 15 अक्टूबर को भी चांदी के भाव में 5,000 रुपये की गिरावट आई थी. इस तरह पिछले 10 दिनों में चांदी हर किलो पीछे 15,100 रुपये सस्ती हो चुकी है. शनिवार को दिल्ली, मुंबई और कोलकाता में एक किलो फिजिकल चांदी का भाव 2,20,000 रुपये रहा, जबकि चेन्नई में इसकी कीमत 2,24,900 रुपये दर्ज की गई.
क्यों गिर रहे हैं सोने-चांदी के दाम?
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल सोने और चांदी पर दबाव डाल रहा है. ब्रेंट क्रूड का भाव 116 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने से महंगाई बढ़ने की चिंताएं बढ़ी हैं. इसके चलते अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनाए रखने की आशंका मजबूत हुई है. जब ब्याज देने वाले विकल्पों का आकर्षण बढ़ता है, तो सोने जैसी बिना ब्याज वाली कीमती धातुओं में निवेशकों की दिलचस्पी कम हो सकती है. इसके अलावा, पश्चिम एशिया में तनाव और ऊर्जा ढांचे पर हमलों की खबरों से भी वैश्विक अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता बढ़ी है.
आगे क्या रहेगा रुख?
अब निवेशकों की नजर 27 और 28 अक्टूबर को होने वाली अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति बैठक पर टिकी हुई है. यदि ब्याज दरों में नरमी के संकेत मिलते हैं, तो सोने-चांदी को सहारा मिल सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार, केवल हालिया गिरावट देखकर जल्दबाजी में निवेश का फैसला न लें; अपनी जरूरत और जोखिम क्षमता को ध्यान में रखकर ही निर्णय लें.
-भारत एक्सप्रेस
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