उत्तर प्रदेश पुलिस को शुक्रवार को 4,543 नए उपनिरीक्षक मिल गए. लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपे. नियुक्ति पत्र हाथ में आते ही युवाओं की खुशी देखने लायक थी. कई अभ्यर्थियों ने इसे अपने जीवन का सबसे यादगार पल बताया. नवनियुक्त अधिकारियों का कहना था कि पूरी चयन प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष रही. उन्होंने बताया कि आवेदन शुल्क के अलावा किसी भी स्तर पर किसी तरह का अतिरिक्त खर्च नहीं करना पड़ा और न ही किसी की सिफारिश की जरूरत पड़ी.
सात साल की मेहनत के बाद मिली सफलता
बदायूं के रहने वाले प्रशांत कुमार का चयन उपनिरीक्षक नागरिक पुलिस पद के लिए हुआ है. उन्होंने बताया कि वह पिछले सात वर्षों से लगातार तैयारी कर रहे थे. लंबे इंतजार और मेहनत के बाद आखिरकार उन्हें सफलता मिली. प्रशांत ने कहा कि पहले भर्ती प्रक्रियाओं को लेकर अक्सर सवाल उठते थे, लेकिन 2017 के बाद स्थिति बदली है और अब चयन प्रक्रिया पर युवाओं का भरोसा बढ़ा है. उनके मुताबिक इस बार सब कुछ तय नियमों के अनुसार हुआ.
सुमित शर्मा बोले- भर्ती प्रक्रिया रही तेज और साफ
उपनिरीक्षक पद पर चयनित सुमित शर्मा ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2022 से तैयारी शुरू की थी. उनका कहना है कि भर्ती का पूरा चरण काफी व्यवस्थित तरीके से पूरा किया गया. परीक्षा से लेकर अंतिम चयन तक कहीं भी अनावश्यक देरी नहीं हुई. उन्होंने कहा कि अब जब उन्हें पुलिस सेवा का अवसर मिला है तो वे अपनी जिम्मेदारियां पूरी निष्ठा के साथ निभाएंगे और किसी भी व्यक्ति के साथ अन्याय नहीं होने देंगे.
शिवी शर्मा के लिए धनतेरस बनी यादगार
चयनित अभ्यर्थी शिवी शर्मा ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि पिछले एक साल से वह इस परीक्षा की तैयारी कर रही थीं. अब सफलता मिलने से उनका सपना पूरा हो गया है. उन्होंने कहा कि दीपावली से पहले और धनतेरस के दिन नियुक्ति पत्र मिलना उनके लिए किसी विशेष आशीर्वाद से कम नहीं है. शिवी के मुताबिक भर्ती के दौरान किसी प्रकार की रिश्वत नहीं देनी पड़ी, इसलिए नौकरी के दौरान भी वह पूरी ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ काम करेंगी. साथ ही उन्होंने गरीब और जरूरतमंद लोगों की सहायता को अपनी प्राथमिकता बताया.
सेना से सेवानिवृत्त उदयवीर सिंह को मिली नई जिम्मेदारी
बरेली के रहने वाले उदयवीर सिंह कठेरिया, जो भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हो चुके हैं, अब उत्तर प्रदेश पुलिस में उपनिरीक्षक के रूप में अपनी नई पारी शुरू करेंगे. उन्होंने कहा कि निष्पक्ष चयन प्रक्रिया की वजह से ही उन्हें यह अवसर मिला है. उनका मानना है कि वर्तमान व्यवस्था में युवाओं को बिना किसी परेशानी के अपनी योग्यता के आधार पर आगे बढ़ने का मौका मिल रहा है.
एक साल में पूरी हुई भर्ती प्रक्रिया
मुजफ्फरनगर की अंशु चौधरी ने कहा कि इतनी बड़ी भर्ती प्रक्रिया का लगभग एक साल के भीतर पूरा हो जाना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है. उनके अनुसार पहले भर्ती प्रक्रियाएं लंबे समय तक अटकी रहती थीं, लेकिन इस बार काम अपेक्षाकृत तेज गति से पूरा हुआ. अंशु ने मुख्यमंत्री का धन्यवाद देते हुए कहा कि प्रशिक्षण के दौरान जो भी सीख मिलेगी, उसे अपने कामकाज में लागू करेंगी और पूरी निष्ठा के साथ जनता की सेवा करेंगी.
बचपन का सपना हुआ सच
बरेली के राजा बाबू के लिए यह दिन खास रहा. उन्होंने बताया कि पुलिस विभाग में नौकरी करने का सपना वह बचपन से देखते आ रहे थे और अब उनका यह सपना पूरा हो गया है. राजा बाबू ने कहा कि आवेदन शुल्क जमा करने के अलावा भर्ती प्रक्रिया में उन्हें किसी भी व्यक्ति को एक रुपया तक नहीं देना पड़ा. उन्होंने भरोसा जताया कि पुलिस सेवा में रहते हुए गरीब, शोषित और वंचित वर्ग को न्याय दिलाने की पूरी कोशिश करेंगे.
युवाओं ने पारदर्शी व्यवस्था पर जताया भरोसा
नवनियुक्त उपनिरीक्षकों की प्रतिक्रियाओं में एक बात समान रूप से दिखाई दी. सभी ने भर्ती प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और मेरिट आधारित बताया. उनका कहना था कि चयन केवल मेहनत और प्रदर्शन के आधार पर हुआ. युवाओं ने उम्मीद जताई कि जिस विश्वास के साथ उन्हें यह जिम्मेदारी सौंपी गई है, उसी विश्वास को कायम रखते हुए वे कानून व्यवस्था को मजबूत करने और आम लोगों को न्याय दिलाने का काम करेंगे.
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