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ओवैसी ने फूंका चुनावी बिगुल, पश्चिमी यूपी की 70 सीटों पर AIMIM की नजर; सपा पर साधा निशाना

AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी 20 सितंबर से उत्तर प्रदेश के दौरे पर निकलेंगे. पार्टी का फोकस पश्चिमी यूपी की करीब 70 विधानसभा सीटों पर रहेगा, जहां रैलियों और जनसंपर्क अभियान के जरिए संगठन मजबूत करने की तैयारी है.

Asaduddin Owaisi

एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी. (फाइल फोटो)

मेरठ: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर अभी से राजनीतिक गतिविधियां तेज होती दिखाई दे रही हैं. अलग-अलग दल जहां अपने संगठन को मजबूत करने और जनता के बीच पहुंच बढ़ाने में जुटे हैं, वहीं ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने भी यूपी में अपनी चुनावी तैयारियों को गति देने का संकेत दिया है. पार्टी प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी 20 सितंबर से उत्तर प्रदेश के दौरे पर निकलेंगे.

पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शादाब चौहान ने मेरठ में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान AIMIM की आगामी रणनीति की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि ओवैसी के दौरे में जनसभाओं के साथ-साथ पार्टी के स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं के साथ बैठकें भी होंगी. पार्टी का मकसद अलग-अलग इलाकों में संगठन की स्थिति को समझना और चुनाव से पहले अपने नेटवर्क को मजबूत करना है.

कानपुर, श्रावस्ती और आजमगढ़ से शुरुआत

शादाब चौहान के मुताबिक, ओवैसी के शुरुआती कार्यक्रमों में कानपुर, श्रावस्ती और आजमगढ़ शामिल हैं. इन जिलों में पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात और जनसभाओं के बाद ओवैसी पश्चिमी उत्तर प्रदेश का रुख करेंगे.

AIMIM ने खास तौर पर पश्चिमी यूपी को अपने अभियान के लिए अहम माना है. पार्टी की योजना इस इलाके की करीब 70 विधानसभा सीटों पर रैलियां और बड़े स्तर पर जनसंपर्क अभियान चलाने की है. इन सीटों पर पार्टी स्थानीय मुद्दों को उठाने के साथ अपना संगठन खड़ा करने की कोशिश करेगी.

पश्चिमी यूपी पहले से ही राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है. ऐसे में AIMIM के यहां सक्रिय होने से आने वाले दिनों में सियासी गतिविधियां और बढ़ सकती हैं. पार्टी की कोशिश केवल चुनावी रैलियों तक सीमित रहने के बजाय जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं की टीम तैयार करने की भी है.

सपा पर AIMIM का हमला

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शादाब चौहान ने समाजवादी पार्टी को भी निशाने पर लिया. उन्होंने आरोप लगाया कि सपा लंबे समय से मुस्लिम समाज के वोटों का इस्तेमाल करती रही है, लेकिन राजनीतिक हिस्सेदारी देने के मामले में समाज को अपेक्षित प्रतिनिधित्व नहीं मिला.

शादाब चौहान ने दावा किया कि पिछले 34 वर्षों में मुस्लिम वोटों का इस्तेमाल तो हुआ, लेकिन उसके अनुपात में राजनीतिक भागीदारी नहीं दी गई. AIMIM इसी मुद्दे को लेकर अपनी राजनीति को आगे बढ़ाने की तैयारी में है.

AIMIM का यह अभियान उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति में कितना असर डालेगा, यह आने वाले समय में साफ होगा. फिलहाल पार्टी का जोर संगठन के विस्तार और अपने मुद्दों को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाने पर है.

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-भारत एक्सप्रेस



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