Fatehpur Electricity Dept Scam: फतेहपुर/यश द्विवेदी: उत्तर प्रदेश के फतेहपुर जिले में बिजली विभाग के अंदर एक हैरान करने वाला ‘डिजिटल’ भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है. यहां विद्युत वितरण खंड-बिंदकी के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर राजेश कुमार को गंभीर आरोपों के चलते तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है. उन पर आरोप है कि वे ठेकेदारों और उपभोक्ताओं से सीधे ‘क्यूआर कोड’ (QR Code) भेजकर रिश्वत की वसूली करते थे.
पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड ने प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर यह बड़ी कार्रवाई की है. निलंबन अवधि के दौरान राजेश कुमार को आजमगढ़ क्षेत्र से संबद्ध कर दिया गया है. आइये जानते हैं क्या है पूरा मामला?
क्या हैं गंभीर आरोप? (Fatehpur Executive Engineer)
विभाग द्वारा जारी आदेश और शिकायतों के अनुसार, राजेश कुमार पर पद का दुरुपयोग करने के कई संगीन आरोप हैं. इसमें से कुछ इस प्रकर हैं.
क्यूआर कोड से ‘डिजिटल’ वसूली: सबसे गंभीर आरोप यह है कि अधिकारी अपने सीयूजी (CUG) और निजी मोबाइल नंबरों से लोगों को क्यूआर कोड भेजते थे और अपने निजी कार्यों के लिए धनराशि सीधे खातों में ट्रांसफर करवाते थे.
कर्मचारियों को धमकी: आरोप है कि वे अपने अधीनस्थ कर्मचारियों पर नियम विरुद्ध काम करने का दबाव बनाते थे. बात न मानने पर उन्हें ट्रांसफर (स्थानांतरण), सस्पेंशन (निलंबन) और विभागीय कार्रवाई का डर दिखाया जाता था.
अमर्यादित भाषा का प्रयोग: उच्चाधिकारियों और कर्मचारियों के साथ अभद्र व्यवहार करने और गाली-गलौज (अमर्यादित भाषा) करने का भी आरोप है, जो कर्मचारी आचरण नियमावली का सीधा उल्लंघन है.
ऑडियो-सबूत के साथ मुख्यमंत्री से शिकायत
इस पूरे ‘डिजिटल घूसकांड’ की शिकायत ‘मानव लोक अधिकार सेवा संस्थान’ ने सीधे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से की है. संस्था के पदाधिकारियों का दावा है कि उनके पास राजेश कुमार के खिलाफ पुख्ता सबूत मौजूद हैं, जिनमें रिश्वत मांगने की ऑडियो रिकॉर्डिंग, कॉल डिटेल्स (CDR) क्यूआर कोड के जरिए किए गए ऑनलाइन भुगतान के स्क्रीनशॉट/प्रमाण शामिल हैं.
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आगे क्या होगी कार्रवाई? (Fatehpur Electricity Dept Scam Case)
शिकायत में ट्रांसफर-पोस्टिंग और भुगतान प्रक्रियाओं में भी बड़े स्तर पर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है. विभाग ने स्पष्ट किया है कि निलंबन के साथ ही इस पूरे प्रकरण की विस्तृत विभागीय जांच शुरू कर दी गई है. जांच रिपोर्ट आने के बाद अधिकारी के खिलाफ आगे की सख्त दंडात्मक कार्रवाई तय की जाएगी. फिलहाल निलंबन अवधि में उन्हें नियमानुसार केवल जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा.
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