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KGMU का ‘मुन्ना भाई’ हुआ गिरफ्तार! अवैध धर्मांतरण से लेकर हिन्दू लड़कियों को फंसाने तक, जानें फर्जी डॉक्टर ने खोले कौन से राज?

Hassam Ahmad की गिरफ्तारी के बाद KGMU में बड़ा खुलासा हुआ. पुलिस अब हनी ट्रैप, फर्जी पहचान और संदिग्ध नेटवर्क से जुड़े एंगल की जांच कर रही है…

KGMU Fake Doctor Hassam Ahmad Case: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में पिछले 4 साल से ‘डॉक्टर’ बनकर घूम रहे हस्साम अहमद की गिरफ्तारी के बाद अब ऐसी परतें खुल रही हैं, जिसने खुफिया एजेंसियों के भी कान खड़े कर दिए हैं. पुलिस की जांच अब केवल ‘मरीजों से ठगी’ तक सीमित नहीं है. बल्कि खबर यह भी है कि हस्साम के मोबाइल और उसके संपर्कों से ऐसे संकेत मिले हैं कि वह अस्पताल की आड़ में एक खतरनाक खेल खेल रहा था, जिसमें हिंदू लड़कियों को निशाना बनाना और अवैध धर्मांतरण के लिए जमीन तैयार करना शामिल था.

सफेद कोट की आड़ में ‘हनी ट्रैप’ का खेल?

जांच में यह चौंकाने वाली बात (KGMU Fake Doctor new angle) सामने आई है कि हस्साम अहमद अक्सर अस्पताल परिसर में आने वाली युवती और महिला तीमारदारों पर नजर रखता था. एमबीबीएस डॉक्टर की अपनी फर्जी पहचान का इस्तेमाल कर वह लड़कियों को प्रभावित करता था.

बता दें कि सफेद कोट और केजीएमयू का रसूख दिखाकर उसने कई हिंदू लड़कियों से दोस्ती की और उन्हें अपने जाल में फंसाया. पुलिस को उसके फोन से कुछ ऐसी चैट्स और तस्वीरें मिली हैं, जो इशारा करती हैं कि वह अपनी इस ‘डॉक्टर’ वाली इमेज का इस्तेमाल महिलाओं के शोषण और उनके ब्रेनवाश के लिए कर रहा था.

धर्मांतरण सिंडिकेट से जुड़े होने का शक (KGMU Fake Doctor Hassam Ahmad)

हस्साम की गतिविधियां केवल अस्पताल के वार्डों तक ही सीमित नहीं थीं. पुलिस इस एंगल पर भी गहराई से काम कर रही है कि क्या वह किसी बड़े धर्मांतरण सिंडिकेट का हिस्सा है.

मरीजों का ब्रेनवाश: आरोप है कि वह पूर्वांचल से आने वाले गरीब और लाचार मरीजों की मदद के बहाने उनसे नजदीकियां बढ़ाता था और फिर धीरे-धीरे उन्हें धर्म विशेष की ओर प्रेरित करने की कोशिश करता था.

संदिग्ध नेटवर्क: पुलिस उन ‘मददगारों’ की तलाश कर रही है जो हस्साम को केजीएमयू के भीतर एंट्री और स्टेथोस्कोप जैसे सामान मुहैया कराते थे. शक है कि इस नेटवर्क का इस्तेमाल गुपचुप तरीके से धर्मांतरण की गतिविधियों को अंजाम देने के लिए किया जा रहा था.

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लारी कार्डियोलॉजी में पैठ और ‘खास’ मिशन

अस्पताल के सबसे व्यस्त ‘लारी कार्डियोलॉजी’ विभाग में उसकी 4 साल की मौजूदगी अब बड़े सवाल खड़े कर रही है. खुफिया विभाग (LIU) इस बात की जांच कर रहा है कि क्या हस्साम का मकसद सिर्फ पैसा कमाना था या वह किसी खास ‘मिशन’ के तहत अस्पताल के संवेदनशील डेटा और लोगों तक पहुंच बना रहा था. कुछ चश्मदीदों का कहना है कि उसे अक्सर अस्पताल के बाहर संदिग्ध लोगों के साथ बैठकें करते देखा गया था.

एजेंसियों के रडार पर ‘मुन्ना भाई’ का पूरा बैकग्राउंड

हस्साम अहमद के शिया कॉलेज से लेकर खदरा तक के पूरे इतिहास को खंगाला जा रहा है. पुलिस यह भी देख रही है कि उसे पिछले 4 साल से फंडिंग कहाँ से हो रही थी और वह बिना किसी आय के किराए के मकान और लग्जरी लाइफस्टाइल कैसे मेंटेन कर रहा था. केजीएमयू प्रशासन ने भी इसे एक बड़ी ‘सुरक्षा चूक’ मानते हुए स्वीकार किया है कि हस्साम अहमद जैसे तत्वों का इतने लंबे समय तक पकड़ा न जाना सिस्टम की बड़ी नाकामी है.

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-भारत एक्सप्रेस



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