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Mainpuri Murder Case: 9 करोड़ की जमीन के लिए वारिस अली की हत्या! सरकारी शिक्षक समेत 3 आरोपी गिरफ्तार

Mainpuri Waris Ali murder case: मैनपुरी के कुरावली में वारिस अली हत्याकांड का पुलिस ने खुलासा करते हुए सरकारी शिक्षक सहित तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है. जांच में सामने आया कि करोड़ों रुपये की जमीन हड़पने की साजिश के तहत हत्या कर शव को सड़क हादसा दिखाने के लिए फेंका गया था.

मैनपुरी पुलिस को हत्या मामले में मिली सफलता

मैनपुरी पुलिस को हत्या मामले में मिली सफलता

Mainpuri Waris Ali murder case मैनपुरी/जीत कुमार:  मैनपुरी के कुरावली में वारिस अली हत्याकांड में पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी है. प्रथम जांच में सामने आया था कि वारिस अली की मौत सड़क हादसे में हुई थी. पुलिस के मुताबिक वारिस अली की मौत नहीं बल्कि हत्या हुई थी. हत्या के पीछे करोड़ों रुपये की जमीन हड़पने की साजिश छिपी थी. मामले में एक सरकारी शिक्षक समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस ने हत्या में प्रयुक्त बलेनो कार, सरिया, तकिया और मृतक का आधार कार्ड भी बरामद किया.

करोड़ों की जमीन के लालच में की थी हत्या

बीते 20 मई को कुरावली कस्बे के फतेहजंगपुर अंडरपास सर्विस रोड पर मोहल्ला कौआटोला निवासी वारिस अली का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था. प्रथम दृष्टया मामला सड़क दुर्घटना का प्रतीत हो रहा था, लेकिन मृतक की पुत्री स्वालिहा की तहरीर पर हत्या का मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने जांच शुरू की. मामला चुनौतीपूर्ण होने के कारण चार विशेष टीमों का गठन किया गया.  जांच के दौरान सीसीटीवी फुटेज, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों के आधार पर पुलिस को पता चला कि वारिस अली की ऑन रोड करोड़ों रुपये कीमत की जमीन पर आरोपियों की नजर थी.

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सरकारी शिक्षक ने अपने साथियों के साथ मिलकर की थी हत्या

पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी अरुण कुमार, जो पेशे से सरकारी शिक्षक है और वारिस अली से 35 लाख रुपये में एक प्लॉट खरीदने की बात कही थी, लेकिन कथित रूप से अपने ड्राइवर के नाम करीब 12.5 बीघा जमीन का बैनामा करा लिया. इस जमीन की कीमत लगभग 9 करोड़ रुपये बताई जा रही है. पुलिस का दावा है कि साजिश का खुलासा होने के डर से अरुण कुमार ने अपने साथियों रविंद्र सोलंकी और ऋषिबाबू के साथ मिलकर वारिस अली की हत्या की योजना बनाई. 19 मई को मौका मिलने पर आरोपियों ने वारिस अली की हत्या कर दी और घटना को दुर्घटना का रूप देने के लिए शव को फतेहजंगपुर अंडरपास सर्विस रोड पर फेंक दिया. पुलिस के मुताबिक घटना के दौरान मास्टरमाइंड अरुण ने खुद को बचाने के लिए मोबाइल चालू रखा और विभिन्न स्थानों पर सीसीटीवी कैमरों में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई, जबकि अन्य आरोपियों ने अपने मोबाइल फोन बंद कर दिए है. पुलिस पूरे मामले की गहनता से जांच कर रही है.

भारत एक्सप्रेस



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