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गोरखपुर की ई-रिक्शा वाली ‘लखपति दीदी’ से मिलेंगे PM मोदी, गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में गूंजेगी मंशा देवी की सफलता की कहानी

गोरखपुर की मंशा देवी ने ई-रिक्शा के हैंडल से अपनी किस्मत बदल दी है. कभी आय के संकट से जूझने वाली मंशा आज ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं और 60 से ज्यादा महिलाओं को रोजगार दे रही हैं.

गोरखपुर की मंशा देवी की कहानी आज उत्तर प्रदेश की लाखों महिलाओं के लिए एक मिसाल बन चुकी है. कभी घर की चारदीवारी और सीमित आय के बीच संघर्ष करने वाली मंशा देवी आज न सिर्फ खुद आत्मनिर्भर हैं, बल्कि वे ‘लखपति दीदी’ बनकर 26 जनवरी को दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करने जा रही हैं.

संघर्ष से स्वाभिमान तक का सफर

मंशा देवी की जिंदगी हमेशा से ऐसी नहीं थी. एक वक्त था जब उनके पास कमाई का कोई ठोस जरिया नहीं था और परिवार की जरूरतों को पूरा करना एक बड़ी चुनौती थी. बदलाव की शुरुआत तब हुई जब वे ‘स्वयं सहायता समूह’ से जुड़ीं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर चल रही सरकारी योजनाओं और ‘सेफ मोबिलिटी कार्यक्रम’ ने उनकी जिंदगी की दिशा ही बदल दी.

मंशा ने सिर्फ ई-रिक्शा चलाना ही नहीं सीखा, बल्कि इसे अपनी आय का मुख्य जरिया बना लिया. आज वे गोरखपुर की सड़कों पर बेखौफ होकर ई-रिक्शा दौड़ाती हैं और एक कुशल ट्रेनर के तौर पर जानी जाती हैं.

कैसे बनी लखपति दीदी?

मंशा देवी की आर्थिक तरक्की किसी को भी हैरान कर सकती है. एक साल पहले तक जहां आय न के बराबर थी, वहीं आज वे हर महीने 20 से 30 हजार रुपये तक कमा रही हैं. साल भर का हिसाब लगायें तो उनकी आय करीब 3 लाख रुपये तक पहुँच चुकी है.

इस कामयाबी के पीछे वित्तीय मदद का भी बड़ा हाथ रहा. उन्हें ‘मुद्रा योजना’ से 1.25 लाख रुपये और ब्लॉक स्तर से 1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिली. इसी पूंजी के भरोसे उन्होंने अपने काम को रफ्तार दी और आज वे हर दिन 800 से 1000 रुपये आसानी से कमा लेती हैं.

मंशा की कहानी सिर्फ अपनी तरक्की तक सीमित नहीं है. उन्होंने ठान लिया था कि वे अपने जैसी दूसरी महिलाओं के भी दिन बदलेंगी. ब्रह्मपुर ब्लॉक समेत पूरे गोरखपुर जिले में उन्होंने अब तक 60 से अधिक महिलाओं को ई-रिक्शा ड्राइविंग और बिजनेस की ट्रेनिंग दी है.

आज ये सभी महिलाएं ड्राइविंग लाइसेंस लेकर सड़कों पर स्वाभिमान के साथ रिक्शा चला रही हैं और अपने परिवार का सहारा बन रही हैं. ये महिलाएं इस बात का सबूत हैं कि अगर सुरक्षा और सही प्रशिक्षण मिले, तो गाँव की बेटियाँ भी आसमान छू सकती हैं.

मिशन ‘सेफ मोबिलिटी’ का कमाल

यह पूरा बदलाव राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत चल रहे ‘सेफ मोबिलिटी’ प्रोग्राम की वजह से मुमकिन हो पाया है. मिशन निदेशक दीपा रंजन के नेतृत्व में चल रहे इस प्रोग्राम का मकसद महिलाओं को सुरक्षित परिवहन और स्वरोजगार से जोड़ना है.

मंशा देवी की यह यात्रा एक ‘समूह सखी’ से शुरू होकर ‘ई-रिक्शा ट्रेनर’ और फिर ‘लखपति दीदी’ तक पहुँचने की है. गणतंत्र दिवस के मौके पर दिल्ली में प्रधानमंत्री से उनकी यह मुलाकात, गोरखपुर की उन तमाम महिलाओं का सम्मान होगा जिन्होंने समाज की पुरानी बेड़ियों को तोड़कर अपनी पहचान बनाई है.

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-भारत एक्सप्रेस



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