उत्तर प्रदेश की योगी सरकार प्रदेश के कारागारों को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और अत्याधुनिक तकनीकों से लैस करने के अभियान में लगातार जुटी हुई है. जेलों के भीतर बंदियों की कड़ी निगरानी से लेकर बाहरी सुरक्षा, प्रशासनिक सुधार और कैदियों के मानसिक व शैक्षिक विकास तक हर स्तर पर क्रांतिकारी बदलाव किए गए हैं. इसी क्रम में प्रदेश की जेलों में सीसीटीवी कैमरों का दायरा बढ़ाते हुए उनकी संख्या 7,000 के पार पहुंचा दी गई है. इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम और इलेक्ट्रिक फेंसिंग से कारागारों की सुरक्षा को अभेद्य बना दिया गया है.
7,000+CCTV और AI आधारित JARVIS प्रणाली
डीजी (कारागार एवं सुधार सेवाएं) पीसी मीना ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप जेल प्रशासन को पूरी तरह पारदर्शी, तकनीक-सक्षम और समयबद्ध बनाया जा रहा है.
निगरानी का विस्तार: जून 2025 में प्रदेश की जेलों में करीब 4,900 सीसीटीवी कैमरे सक्रिय थे, जिनकी संख्या अब बढ़ाकर 7,000 से अधिक कर दी गई है.
मुख्यालय से सीधी कनेक्टिविटी: जेलों की आंतरिक व्यवस्था और बैरकों की निगरानी के लिए एआई आधारित जेएआरवीआईएस (JARVIS) प्रणाली लागू की गई है. इसके तहत 750 से अधिक अत्याधुनिक एआई कैमरों को सीधे कारागार मुख्यालय स्थित केंद्रीय कंट्रोल रूम से जोड़ा गया है, जिससे किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत अलर्ट मिल जाता है.
इलेक्ट्रिक फेंसिंग और बाहरी घेराबंदी मजबूत
डीजी पीसी मीना के अनुसार, जेलों की सुरक्षा केवल चारदीवारी के भीतर तक सीमित नहीं रखी गई है, बल्कि परिधीय (बाहरी) सुरक्षा को भी पुख्ता किया गया है. मुख्य दीवारों पर फेंसिंग वायर के साथ-साथ इलेक्ट्रिक फेंसिंग वायर सिस्टम लगाया गया है. इस बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था का मकसद जेल परिसरों में बाहरी घुसपैठ या सुरक्षा जोखिमों को पूरी तरह समाप्त करना है.
‘ई-प्रिसंस अर्ली रिलीज मॉड्यूल’ लागू करने वाला पहला राज्य बना यूपी
पारदर्शिता की दिशा में बड़ा मील का पत्थर स्थापित करते हुए उत्तर प्रदेश ने समयपूर्व रिहाई के मामलों के त्वरित और निष्पक्ष निस्तारण के लिए ‘ई-प्रिसंस अर्ली रिलीज प्रोसेसिंग मॉड्यूल’ शुरू किया है. इस डिजिटल व्यवस्था को लागू करने वाला यूपी देश का पहला राज्य बन गया है. इससे रिहाई से जुड़ी फाइलों के निस्तारण में लगने वाला समय काफी घट गया है और पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो गई है.
पेपरलेस दफ्तर, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और डिजिटल लाइब्रेरी
जेलों के प्रशासनिक और तकनीकी आधुनिकीकरण के तहत कई अन्य महत्वपूर्ण कार्य भी पूरे किए गए हैं:
मेजरमेंट कलेक्शन यूनिट (MCU): प्रदेश की प्रत्येक जेल में एमसीयू रूम की स्थापना पूरी कर ली गई है.
पेपरलेस प्रशासन: कारागार मुख्यालय और जेल कार्यालयों के प्रशासनिक कामकाज को ई-ऑफिस प्रणाली के जरिए पेपरलेस बनाने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.
पेशी के लिए वीसी यूनिट: बंदियों को अदालतों में सुरक्षित और सुगम तरीके से पेश करने के लिए सभी कारागारों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (VC) यूनिट्स स्थापित की जा रही हैं, जिससे सुरक्षा जोखिम और परिवहन खर्च दोनों कम होंगे.
ग्रीन एनर्जी और रोशनी: जेल परिसरों की छतों पर सोलर पैनल लगाए जा रहे हैं और 58 कारागारों में हाई मास्ट सोलर लाइटें स्थापित की जा रही हैं.
74 जेलों में डिजिटल लाइब्रेरी: बंदियों के पुनर्वास और बौद्धिक विकास को ध्यान में रखते हुए प्रदेश की 74 जेलों में डिजिटल लाइब्रेरी स्थापित की गई हैं, जहां बंदी ई-बुक्स और डिजिटल अध्ययन सामग्री के जरिए अपने ज्ञान का विस्तार कर रहे हैं.
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