Kanwar Yatra की कैसे हुई थी शुरुआत, जानें सबसे पहले कौन लेकर गया था कांवड़
सावन का महीना शुरू होते ही उत्तर भारत के कई हिस्सों में एक खास नजारा देखने को मिलता है हर ओर केसरिया वस्त्रों में सजे शिवभक्त, कंधे पर गंगाजल से भरी कांवड़ उठाए लंबी यात्रा पर निकलते हैं. यह यात्रा भगवान शिव के प्रति श्रद्धा और समर्पण का प्रतीक मानी जाती है. भक्तजन गंगा नदी से जल भरकर विभिन्न शिव मंदिरों तक पहुंचते हैं और शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं. इसे ही कांवड़ यात्रा कहा जाता है.
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