टीम इंडिया के स्टार तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी एक बार फिर सुर्खियों में हैं, लेकिन इस बार मैदान पर उनके प्रदर्शन की वजह से नहीं, बल्कि रमजान के दौरान रोजा न रखने को लेकर हुए विवाद के कारण. चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के सेमीफाइनल में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच खेले गए मैच के दौरान शमी ने मैदान पर एनर्जी ड्रिंक पीया, जिसके बाद ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शाहाबुद्दीन रजवी ने उन पर निशाना साधा.
मौलाना ने शमी को “अपराधी” तक करार दे दिया. इस बयान के बाद सोशल मीडिया से लेकर क्रिकेट प्रेमियों तक में बहस छिड़ गई. जहां एक तरफ कट्टरपंथी मौलाना के समर्थन में उतरे, वहीं शमी के परिवार, उनके बचपन के कोच और भारतीय क्रिकेट प्रशंसकों ने उनका जमकर बचाव किया. इसी बीच पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर का एक पोस्ट वायरल हो रहा है, जिसने इस विवाद को नया मोड़ दे दिया.
कहां से शुरू हुआ विवाद?
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब चैंपियंस ट्रॉफी 2025 के सेमीफाइनल के दौरान मोहम्मद शमी ने मैदान पर एनर्जी ड्रिंक लिया. यह घटना ऐसे समय में हुई जब रमजान का पवित्र महीना चल रहा था. इस साल रमजान 28 फरवरी की शाम से शुरू हुआ था, जिसमें मुसलमान सूर्योदय से सूर्यास्त तक उपवास रखते हैं. मौलाना शाहाबुद्दीन रजवी ने इसे इस्लामी नियमों का उल्लंघन बताते हुए कहा, “मोहम्मद शमी एक मशहूर क्रिकेटर हैं. अगर वह मैच खेल रहे हैं, तो इसका मतलब है कि वह स्वस्थ हैं. ऐसे में उन्हें रोजा रखना चाहिए था. लेकिन उन्होंने पानी और एनर्जी ड्रिंक लिया, जिसे पूरी दुनिया ने देखा. यह गलत संदेश देता है. शरियत के अनुसार, वह एक अपराधी हैं और उन्हें अल्लाह को जवाब देना होगा.”
मौलाना के इस बयान ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया. जहां कुछ लोग मौलाना के साथ खड़े दिखे, वहीं शमी के समर्थकों ने इसे अनावश्यक विवाद करार दिया.
शमी के परिवार और कोच का जवाब
शमी के परिवार ने इस मामले में उनका पुरजोर समर्थन किया. शमी के भाई जैद ने कहा, “शमी दुबई में खेल रहे हैं. रमजान के दौरान लंबे समय तक भूखा रहना पड़ता है. अगर यात्रा लंबी हो और खाने-पीने की सुविधा न हो, तो रोजा छोड़ा जा सकता है. मौलाना बस टीआरपी बटोरने के लिए ऐसा कह रहे हैं. हम ऐसे लोग हैं जो देश के लिए बलिदान देने को तैयार हैं.”
शमी के बचपन के कोच बदरुद्दीन सिद्दीकी ने भी मौलाना के बयान की कड़ी निंदा की. उन्होंने कहा, “मौलाना जो कह रहे हैं, वह देश के हित में नहीं है. हमारे धर्म में अगर आप बीमार हैं या सफर में हैं, तो रोजा बाद में रखा जा सकता है. शमी देश के लिए खेल रहे हैं. ऐसे में देश पहले आता है, बाकी सब बाद में.” उन्होंने आगे कहा, “मौलाना देश का समर्थन नहीं कर रहे. भारत फाइनल खेलने जा रहा है और वे इस तरह के बयान दे रहे हैं. इससे शमी का मनोबल गिरता है. आप इस तरह की बेवकूफी भरी बातें नहीं कर सकते. शमी क्लब मैच नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेल रहे हैं. उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया. पूरा देश उनके साथ खड़ा है. कुछ मौलानाओं की बातों से फर्क नहीं पड़ता. शमी, तुम डटकर खेलो और आगे बढ़ो. देश से बड़ा कुछ नहीं. रोजा रखो, नमाज पढ़ो, लेकिन जब देश की बात आए, तो देश हमेशा पहले रहेगा. अल्लाह सब देख रहा है.”
शोएब अख्तर का वायरल पोस्ट
इस विवाद के बीच पाकिस्तान के पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर का एक पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो गया. शोएब ने लिखा, “रोजा कोई बहाना नहीं है. यह एक प्रेरणा है. कुछ भी आपको ट्रेनिंग से नहीं रोकना चाहिए. इसे अपने फायदे में इस्तेमाल करें.”
भारतीय क्रिकेट प्रशंसक इस बयान को शमी के संदर्भ में जोड़कर देख रहे हैं. कई लोगों का मानना है कि शोएब का यह बयान शमी के पक्ष में एक मजबूत तर्क देता है, जो यह बताता है कि रोजा खिलाड़ियों के प्रदर्शन को प्रभावित करने के बजाय उन्हें प्रेरित कर सकता है.
Roza is not an excuse. Its a motivation. Nothing should stop your from training. Use it in your benefit. #Ramzan #training pic.twitter.com/V2k7Fb297Y
— Shoaib Akhtar (@shoaib100mph) March 6, 2025
दोनों पक्षों की दलीलें
इस पूरे विवाद में दो पक्ष साफ तौर पर सामने आए हैं. एक तरफ मौलाना और उनके समर्थक हैं, जो मानते हैं कि शमी ने इस्लामी नियमों का पालन नहीं किया और ऐसा करके उन्होंने गलत उदाहरण पेश किया. दूसरी तरफ शमी के समर्थक हैं, जो कहते हैं कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करना एक बड़ी जिम्मेदारी है और इस्लाम में भी सफर या स्वास्थ्य के आधार पर रोजा छोड़ने की छूट दी गई है. समर्थकों का यह भी कहना है कि शमी का पहला कर्तव्य अपने देश के प्रति है, जिसके लिए वह दिन-रात मेहनत कर रहे हैं.
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-भारत एक्सप्रेस
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