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सुपुर्द-ए-खाक हुए अयातुल्ला अली खामेनेई: 279 साल बाद मशहद में दफनाया गया ईरान का दूसरा बड़ा शासक

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को मशहद में सुपुर्द-ए-खाक किया गया, जबकि क्षेत्र में सैन्य तनाव और बढ़ गया है. अमेरिका-ईरान टकराव, जवाबी हमलों और होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ते खतरे ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है.

Ali Khamenei Funeral: पश्चिम एशिया में जारी महायुद्ध के बीच ईरान के इतिहास का सबसे बड़ा और गमगीन अध्याय हमेशा के लिए बंद हो गया है. ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को कई महीनों के सार्वजनिक शोक के बाद आखिरकार उनके गृहनगर मशहद में सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया है. खामेनेई की मौत इस साल 28 फरवरी को अमेरिका और इजराइल के भीषण हवाई हमलों के दौरान हुई थी, जिन्होंने लगभग 37 वर्षों तक ईरान पर एकछत्र राज किया था.

खामेनेई के इस अंतिम संस्कार ने 279 साल पुराने उस खूनी इतिहास की यादें ताजा कर दी हैं, जब साल 1747 में करीब 11 साल तक क्रूर शासन करने वाले नादिर शाह की हत्या के बाद उसे इसी मशहद शहर में दफनाया गया था. नादिर शाह के बाद खामेनेई मशहद में दफन होने वाले देश के दूसरे सबसे बड़े शासक बन गए हैं. इस ऐतिहासिक विदाई के बीच पूरे ईरान में अमेरिका और इजराइल के खिलाफ जंग का नया एलान हो गया है.

तेहरान से मशहद तक लाखों का हुजूम(Ali Khamenei Funeral)

अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के लिए शनिवार को पूरे ईरान में मानो वक्त ठहर गया था. सरकार ने राजधानी तेहरान सहित देश के सभी प्रमुख शहरों में सड़कों, हवाई क्षेत्र और रोजमर्रा की सभी गतिविधियों को पूरी तरह से बंद कर दिया था. मशहद की सड़कों पर लाखों ईरानियों का ऐसा सैलाब उमड़ा कि तिल रखने की जगह नहीं बची.

अपने उस नेता को विदाई देने के लिए लोग फूट-फूट कर रो रहे थे, जिसने दशकों तक न सिर्फ ईरान का नेतृत्व किया बल्कि पश्चिमी ताकतों और महाशक्तियों के सामने कभी घुटने नहीं टेके. इस ऐतिहासिक जनाजे के दौरान पूरी मशहद घाटी अमेरिका और इजराइल के खिलाफ विनाशकारी नारों और बदले की गूंज से दहल उठी.

सीजफायर पूरी तरह जमींदोज

खामेनेई के दफन (Ali Khamenei Funeral) होने के साथ ही मिडिल ईस्ट में शांति की बची-खुची उम्मीदें भी पूरी तरह जमींदोज हो गई हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सख्त रुख के बाद अमेरिकी वायुसेना ने गुरुवार तड़के ईरान के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा और खौफनाक हवाई हमला बोल दिया. इस बार अमेरिका ने ईरान के एकमात्र न्यूक्लियर पावर प्लांट के बेहद संवेदनशील इलाकों सहित देश के 90 से अधिक सैन्य ठिकानों पर बमबारी की है.

अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने जो ब्लैक-एंड-व्हाइट फुटेज जारी किए हैं, उसमें ईरान के एयरपोर्ट रनवे और मिसाइल लॉन्चर पल भर में तबाह होते दिख रहे हैं. इस अमेरिकी एक्शन के बाद बहरीन में मौजूद अमेरिकी नौसेना के 5वें बेड़े के मुख्यालय के पास रातभर तीन बार खतरे के सायरन बजे, जिससे खाड़ी देशों में हड़कंप मच गया है.

ईरान का जवाबी पलटवार

अमेरिका के इस भयंकर प्रहार से बौखलाए ईरान के अर्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने भी जवाबी कार्रवाई में अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. ईरान ने कुवैत, कतर और जॉर्डन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर एक साथ कई क्रूज और बैलिस्टिक मिसाइलें और घातक सुसाइड ड्रोन दाग दिए. जॉर्डन के आसमान में ईरान की मिसाइलों को रोकने के लिए एयर डिफेंस सिस्टम एक्टिव हो गए, जिससे पूरे जॉर्डन में सायरन गूंजने लगे.

कुवैत की सेना ने दावा किया है कि उसने तीन बैलिस्टिक मिसाइलों और 10 ड्रोनों को हवा में ही मार गिराया है, लेकिन उनके मलबे की चपेट में आने से कई लोग घायल हुए हैं. अमेरिकी सेंट्रल कमांड का कहना है कि इन हमलों का मकसद होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की दादागिरी और नेविगेशन को ब्लॉक करने की क्षमता को हमेशा के लिए खत्म करना है.

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क्या बंद हो सकता है होर्मुज रूट?

इस सीधे युद्ध के चलते अब दुनिया के सबसे बड़े तेल और ऊर्जा सप्लाई रूट स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर पूरी तरह से तालाबंदी का खतरा मंडराने लगा है. युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया के कुल व्यापार का पांचवां हिस्सा तेल और प्राकृतिक गैस इसी संकीर्ण रास्ते से गुजरता था. पिछले महीने हुए एक अस्थाई समझौते के बाद इस रूट पर जहाजों की आवाजाही थोड़ी बढ़ी थी, जहां जून महीने में करीब 576 कमर्शियल जहाज गुजरे थे, जबकि पिछले साल इसी महीने में यह संख्या 3100 के पार थी. अब ट्रंप की खुली चेतावनी और ईरान के न्यूक्लियर प्लांट के पास हुए धमाकों के बाद वैश्विक तेल बाजार में हाहाकार मच गया है. अगर यह जंग नहीं रुकी तो आने वाले दिनों में दुनिया भर की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा जाएगी.

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-भारत एक्सप्रेस



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